भारत में न जाने कई सरकारें आईं गईं लेकिन भ्रष्टाचार का दानव नष्ट होने का नाम नहीं ले रहा है। इसके पीछे जितना सरकारी मशीनरी जिम्मेदार है उतना ही हम सब भी।
हमें मन माफिक सुविधाएं चाहिए चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न अदा करनी पड़े। हमें सुविधाओं का मोह छोड़ना होगा और देश के बारे में सोचना होगा तभी हम दुनिया के सभ्य और ईमानदार देशों की पंक्ति में शुमार हो सकेंगे। यह बात नगर के बुद्धिजीवियों ने रायशुमारी के दौरान कही।
समाजसेवी एवं त्रिवेणी संस्था के संयोजक किशन बुधिया कहते हैं कि भ्रष्टाचार के लिए मुख्य रूप से भारत की जनता, सरकारी मशीनरी और राजनीतिक दलों के नेता जिम्मेदार हैं।
प्रशासनिक अधिकारी इसे पुष्पित पल्लवित कर रहे हैं। चुनाव जीतने के लिए दल किसी भी स्तर तक गिर जा रहे हैं। जब भ्रष्टाचार की राजनीति समाप्त होगी तभी देश से भ्रष्टाचार हटाने के बारे में सोचा जा सकता है।
भ्रष्ट अधिकारियो ंको कड़ा दंड नहीं मिलेगा तो हर कोई भ्रष्टाचार की राह पर चलने को सोचेगा।
सेठ द्वारका बजाज एजुकेशन सेंटर के निदेशक परितोष बजाज खुद ही सवाल उठाते हैं कि क्या सरकार भ्रष्टाचार खत्म कर सकेगी, फिर खुद ही जवाब भी देते हैं कि सरकारी अंकुश द्वारा भ्रष्टाचार पर लगाम तो लगाया जा सकता है लेकिन उसे खत्म नहीं किया जा सकता है।
जब तक स्वयं सभी व्यक्ति संकल्प नहीं लेंगे, इसे खत्म करना मुश्किल होगा। जिस प्रकार सड़क की स्वच्छता सिर्फ सरकारी मशीनरी द्वारा नहीं हो सकती है उसी प्रकार भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी है।
लोक गायिका अजिता श्रीवास्तव कहती हैं कि हममें ही इच्छाशक्ति का अभाव है तभी भ्रष्टाचार का दानव सिर चढ़ कर बोल रहा है।
महिलाओं को आगे आना होगा। पतियों से सुविधाओं की मांग कम करनी होगी नहीं तो पति भ्रष्टाचार कर धन कमाने की सोचेंगे।
समाजसेवी शिवलाल अवस्थी का मानना है कि व्यवस्था लुंजपुंज है जिसके चलते भ्रष्टाचार हावी हो रहा है। जिन नेताओं ने भ्रष्टाचार के डंक से देश पर प्रहार किया था उन्हें कड़ी सजा मिली होती तो देश का कायाकल्प हो गया होता लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हुआ नहीं