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कर्मचारी नदारद, दफ्तरों में सन्नाटा

Thu, 11 Aug 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
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दफ्तरों में सन्नाटा
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कर्मचारी बुधवार को दफ्तर आए जरूर लेकिन अपनी सीट पर नहीं बैठे। कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। हड़ताल से अनजान ग्रामीण कामकाज नहीं होने पर मायूस होकर लौटे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की तीन दिन हड़ताल का पहले ही दिन से प्रभावी रही। कलक्ट्रेट परिसर में हुई सभा में कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है और वे वादाखिलाफी बरदाश्त नहीं करेंगे।
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परिषद के जिलाध्यक्ष लल्लू तिवारी ने कहा सरकार की वादाखिलाफी के चलते कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है। सरकार तीन दिनों में नहीं चेती तो यह हड़ताल अनिश्चित काल तक चल सकती है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने कहा कि यह कर्मचारियों के अस्तित्व की लड़ाई है। कर्मचारी अब जाग गया है। अन्याय के खिलाफ यह निर्णायक लड़ाई है।


कोषागार संघ नेता राजपाल ने सातवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों के बारे में चर्चा की। सिंचाई विभाग के गयम्बक उपाध्याय ने कहा कि छठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी तमाम विसंगतियों से युक्त है। उन्हें दूर करने के बजाय एक और विसंगतिपूर्ण वेतन आयोग की सिफारिशों को थोपा जा रहा है। पीडब्लूडी के विनय श्रीवास्तव और पवन तिवारी ने कहा कि कैशलेश इलाज की सुविधा, मकान किराया भत्ता को डीए से जोड़ने की मांग की। 
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लेखपाल संघ के रामआसरे सरोज मोटरसाइकल भत्ता दिया जाए। नरेश शर्मा, अबरार अहमद, धीरज किशोर, ओम प्रकाश उपाध्याय, विनोद मिश्र, विजय मौर्य, कमलेश्वर दूबे, राजेंद्र तिवारी, शिशुपाल दूबे, एके पांडेय, केएन पांडेय, चंद्रशेखर मिश्र, इजहार अहमद, उमा शुक्ला, कुसुम शुक्ला, केके पांडेय, रुक्मिणी रमण आदि ने अपने विचार व्यक्त किया। इस दौरान सुरेंद्र पांडेय, रवि दूबे, राजेंद्र श्रीवास्तव, रविंद्र जायसवाल, विजय लाल दूबे, जगदीश दूबे, अनिल तिवारी, रामबाबू मिश्र आदि मौजूद रहे।
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