मौसम के यू-टर्न लेने से चैत्र मास में सावन जैसा एहसास हो रहा है। रविवार को दिन भर हुई बूंदाबांदी से जहां एक ओर तापमान लुढ़क कर नीचे चला गया, वहीं किसानाें के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं। बारिश के कारण नगर क्षेत्र के कई मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं मार्गों पर जगह-जगह लगे कीचड़ से लोगाें को असुविधा का सामना करना पड़ा।
मौसम का मिजाज गड़बड़ाने से जनपद के किसानों की धुकधुकी बढ़ गई है। किसानाें को चिंता सताने लगी है कि यदि बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हो गई तो खेतों में खड़ी गेहूं सहित दलहनी/तिलहनी की फसल भी नष्ट हो जाएगी। अगर इंद्रदेव का मिजाज ऐसे ही रहा तो गेहूं के पैदावार में बड़े पैमाने पर कमी आएगी। दुर्भाग्यवश ओलावृष्टि हो गई तो किसानाें के घरों में अन्न के दाने भी नहीं पहुंचेंगे। किसानाें की खून-पसीने की कमाई मौसम की बेरुखी के चलते खत्म हो जाएगी। विगत एक पखवारे पूर्व हुई बरसात व ओलवृष्टि के चलते जनपद के करीब 20 प्रतिशत रबी की फसलाें पर ग्रहण लग चुका है, अब यदि मौसम इसी तरह से रहा तो किसानों को काफी नुकसान पहुंचेगा। रविवार को भगवान भास्कर के दर्शन न देने से ठंड व गलन बनी रही। नगर के प्रमुख बाजाराें व सड़काें पर निकलने वाले लोग ऊलेन परिधान धारण कर सांयकाल अपने घराें से निकले थे। अवकाश का दिन होने के कारण प्रमुख बाजाराें में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं सड़कों पर उतने लोग नहीं दिखाई दिए, जितने अन्य दिनाें में दिखाई पड़ते थे। दिन भर बूंदाबांदी होने के कारण लोग अपना कामकाज भीगते हुए किए।