स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीफ) की लखनऊ इकाई ने देश और उत्तर प्रदेश के 42 टोल प्लाजा से टैक्स वसूलने में 120 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया है। मामले में मंगलवार की रात मिर्जापुर के लालगंज स्थित अतरैला टोल प्लाजा पर छापा मारकर चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। एसटीएफ के इंस्पेक्टर दीपक सिंह ने तहरीर देकर लालगंज थाने में चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। एसटीएफ ने आरोपियों को लालगंज थाने की पुलिस के हवाले कर दिया।
एसटीएफ के मुताबिक, कुछ टोलकर्मियों ने सॉफ्टवेयर हैक करके घोटाला किया है। टोलकर्मी 100 रुपये शुल्क वसूलते थे, लेकिन बैंक खाते में 90 रुपये ही जाते थे। दस रुपये टोलकर्मियों के खाते में चले जाते थे। जो गाड़ियां बिना टोल के निकाली जाती थीं, उनकी फर्जी रसीद बनाकर दी जाती थी। एसटीएफ की सरकारी गाड़ी की भी फर्जी रसीद बनाई गई और 220 रुपये वसूले गए। इस मामले में एनएचएआई के अफसरों और कर्मियों की भूमिका सामने आई है। जल्द ही और गिरफ्तारी संभव है।
आरोपियों के मुताबिक अतरैला टोल प्लाजा से ही रोजाना 40 से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त वसूली की जाती है। इसका बंटवारा कंपनी, एनएचएआई के अफसर-कर्मचारी और टोलकर्मियों में होता था। मामले में गोरखपुर के पीपीगंज स्थित नयनसर टोल प्लाजा से भी लैपटॉप सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।