हलिया। हथेड़ा और पुरवा अवसान सिंह गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन बृहस्पतिवार को व्यास पंडित विष्णुधर द्विवेदी ने कंस उद्धार प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। बताया कि भगवान श्री कृष्ण का चरित्र ही ‘रास’ है और रास स्वयं भगवान का स्वरूप है।रासलीला में केवल गोपियों का प्रवेश था, पुरुष रूप में केवल परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण ही थे। इससे यह संदेश मिलता है कि समस्त जीवात्माएं परमात्मा से मिलन के लिए ही हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज से मथुरा जाकर मात्र 11 वर्ष 56 दिन की आयु में कंस का उद्धार किया और माता-पिता व नाना को कारागार से मुक्त कराया। इसके बाद संदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर अल्प समय में ही सभी विद्याओं में पारंगत हो गए। कथा में आगे मगध नरेश जरासंध के आक्रमण, द्वारकापुरी की स्थापना, रुक्मिणी विवाह और शिशुपाल वध के प्रसंग भी सुनाए। इस अवसर पर सुधीर सिंह, विनय सिंह, काशी मिश्रा, लक्ष्मीकांत मिश्रा, जितेंद्र सिंह, शिवाकांत, सूर्यनारायण, शिवनारायण, आशीष मिश्रा, मोहनलाल द्विवेदी आदि भागवत प्रेमी मौजूद रहे।