- 9479 ने किया था निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए तीन चरणों में हुए आवेदन में मात्र 1916 का ही आवंटन हो सका जबकि योजना के तहत लगभग 5000 सीटें उपलब्ध हैं। अधिकतर आवेदनों की छोटी- छोटी कमी या त्रुटियों के चलते छंटाई कर दी गई। जिससे उनको योजना का लाभ नहीं मिल सका।
योजना के लिए जिले के 799 विद्यालयों की मैपिंग की गई है। इन विद्यालयों में योजना का लाभ दुर्बल समूह के आवेदकों को मिल सकता था। इसके लिए विद्यालयों की छात्र संख्या के आधार पर 25 प्रतिशत स्थान इन आरटीई योजना के आवेदकों के लिए आरक्षित था। जिनकी संख्या पूरे जिले में 5000 है। इन विद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रथम चरण में 5770 आवेदन आए थे। जिनमें से मात्र 1153 का ही चयन हो सका था। इसी प्रकार दूसरे चरण में 2363 आवेदन आए थे, जिनमें से 368 का आवंटन हुआ। तीसरे व अंतिम चरण में 1346 आवेदन आए जिनमें से 395 अभ्यर्थियों का चयन निजी विद्यालयों के लिए किया गया। इस प्रकार तीनों चरण में 9479 आवेदन आए जिनमें से मात्र 1916 को ही आवंटन का हो सका। शेष 7563 आवेदन या तो लॉटरी में आए नहीं या तो छोटी-मोटी त्रुटियों के चलते आवेदन को निरस्त कर दिया गया।
इनसेट
वार्ड से बाहर होते ही निरस्त हो जाता है आवेदन
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया होने से जगह, नाम, पिता के नाम आदि में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है। इसके साथ ही यदि कोई बहुत प्रचलित विद्यालय है तो अधिकांश लोग उसी विद्यालय का विकल्प भरते हैं लेकिन विद्यालय में स्थान सीमित होने के कारण कुछ को ही आवंटन होता है। अन्य विकल्प न होने से आवेदन आगे बढ़ ही नहीं पाता। डीसी सामुदायिक सहभागिता अरविंद कुमार ने बताया कि एक विद्यालय जो आवेदक के घर के बगल में ही क्याें न हो लेकिन यदि वार्ड में अंतर आ गया तो आवेदन निरस्त हो जाएगा। इसी प्रकार नाम की स्पेलिंग या पता में कोई अंतर होता है तो भी आवेदन निरस्त हो जाता है। आवेदन करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए और अपने ही वार्ड के विद्यालय के लिए आवेदन करना चाहिए।