जिले के कई इलाकों में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण करती चली जा रही है। तालाबों की तलहटियों से धूल उड़ने से जहां पशु-पक्षियों के भी हलक की प्यास नहीं बुझ पा रही है, वहीं भूमिगत जलस्तर 45 से 50 फीट खिसकने से गांवों में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने भी जवाब दे दिया है। सबसे अधिक परेशानी हलिया ब्लॉक के लहुरिया दह इलाके में देखने को मिल रही है, जहां दो टैँकरों से दो हजार लोगों को पानी पिलाने की कवायद की जा रही है। मार्च में ही समस्या की सूचना तत्कालीन जिलाधिकारी को दी गई थी, उनके द्वारा निर्देश भी दिया गया था कि 15 दिन के अंदर हैंडपंपों को दुरुस्त नहीं कराए गए तो ग्राम पंचायत अधिकारी नपेंगे, लेकिन अभी कोई कारवाई नहीं होने से उनका फरमान कागजी साबित हो रहा है।
जिले के हलिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत दवहट के लहुरियादह मजरे में दो हजार के आबादी वाले क्षेत्र में पेयजल के टैंकर के को देखते ही ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की लाइन लग जा रही है। पीने के पानी के लिए यहां आने वाले टैंकरों से किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है लेकिन मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हैंडपंप और तालाब सूख चुके हैं। ग्रामीण गोपीचंद, राजाराम, लक्ष्मण दास, महराजी देवी आदि का कहना है कि पानी बिना आधा दर्जन मवेशियों की मौत हो चुकी है। ऊंची पहाड़ी पर बसे इस गांव में जब तक पानी की टंकी नहीं बनाई जाएगी तब तक समस्या से निजात मिलता दिखाई नही दे रहा है। जमालपुर ब्लॉक में पहाड़ियों से सटे नक्सल प्रभावित कई गांवों में पेयजल के लिए हायतौबा मची हुई है। नदी-नाले व तालाबों से पानी नदारद हो गया है, वहीं पानी के सूखने से कूप भी निष्प्रयोज्य बने हुए हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
क्षेत्र के लोहराजपुर, भोकरौध, भाईपुर, लठिया सहिजनी, रामपुर, जफराबाद, शेरवां, नौडिहा, नंदपुर, बिसौरा, चकलठिया आदि नक्सल प्रभातिव गांवों में प्रचंड गर्मी में पेयजल समस्या लोगों के सिर चढ़कर बोल रही है। जलस्तर तेजी से खिसकने से जहां अधिकांश हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, वहीं जो हैंडपंप पानी दे भी रहे हैं, उनमें कीचड़युक्त व दूषित पानी निकल रहा है, जिससे लोगों के हलक की प्यास नहीं बुझ पा रही है। पेयजल समस्या से निजात को लेकर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान बजट नहीं होने का रोना रो रहे हैं, वहीं जमालपुर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी घनश्याम दास गुप्ता ने कहा कि गांवों में खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए ग्राम पंचायतों के सेक्रेटरी व प्रधानों को निर्देश दे दिए गए है। यदि अभी तक खराब पड़े हैंडपंप नहीं बने हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।राजगढ़ इलाके में सूखे तालाबों को तो घाघर नहर से भरा जा रहा है लेकिन पेयजल की किल्लत बनी हुई है। विकास खंड सीखड़ में काफी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। विकास खंड के 1540 हैंडपंपों में से 95 हैंडपंप अर्से से खराब पड़े हैं जिसके चलते ग्रामीण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।