मिर्जापुर। पूर्वांचल के जिलों में एआरटीओ द्वारा एजेंट के जरिए वसूली के मामले में मिर्जापुर भी शामिल है। सूत्रों की माने तो जिले में चोरी छिपे परिवहन विभाग में तैनात रहे पूर्व सिपाही निजी एजेंटों द्वारा वसूली करा रहे हैं। ओवरलोड ट्रकों से वसूली कर पास करा रहे। उधर, एसआईटी वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर समेत 18 जिलों में एआरटीओ द्वारा वसूली के मामले की जांच कर रही है। हर जिले में एंट्री का अलग-अलग रेट तय है। मिर्जापुर में एक हजार से तीन हजार रुपये तक एंट्री के लिए वसूली की जा रही।
हाल ही में एआरटीओ रविकांत शुक्ला पर रात में ओवरलोड चेकिंग के दौरान कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। शासन के निर्देश पर अधिकारी ओवरलोड रोकने का कार्य कर रहे है, पर सूत्रों की माने तो चोरी छिपे आरटीओ के पुराने सिपाही गिरोह चला रहे। बताया जाता है कि वे एजेंट के जरीए इस नजर रखते हैं कि अधिकारी कब और किस ओर चेकिंग पर निकल रहे। बाइक सवार एजेंट अधिकारियों का पीछा करने के बाद उनका लोकेशन देते रहते हैं, इसी के अनुसार ओवरलोड ट्रकों को रूट तय कर पास करा दिया जाता है। परिवहन विभाग के अधिकारी जिस रोड पर वाहन चेकिंग करने निकलते हैं, उस ओर के ट्रकों को खड़ा करा देते हैं। अधिकारी जब घर पर आते है तो फिर ओवरलोड ट्रकों को चलने की सूचना दे दी जाती है।
गौरतलब है कि वसूली के मामले में एसआईटी जांच कर रही। इसमें मिर्जापुर में 2017 से तैनात एआरटीओ प्रवर्तन की जांच की जा रही है। उस दौरान मिर्जापुर में इंट्री का खुला खेल चलता था। एआरटीओ के सिपाही एजेंटों के माध्यम से वसूली करते थे। भ्रष्टाचार मामले में मिर्जापुर के एआरटीओ का नाम आने से परिवहन विभाग में खलबली मच गई है।
जिले में ओवरलोडिंग नहीं की जा रही है। शासन के निर्देश पर ओवरलोडिंग करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। रात में चेकिंग के दौरान ओवरलोडिंग पाए जाने पर कार्रवाई भी की गई है।
-रविकांत शुक्ला, एआरटीओ