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डीएफसी के लिए अवशेष जमीन मिली

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मिर्जापुर। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की अवशेष भूमि अधिग्रहित कर ली गई है और उसे कार्यदायी संस्था को हस्तांतरित भी कर दिया गया है। इस कॉरिडोर के बन जाने से विंध्य क्षेत्र के विकास की गति तेज हो जाएगी।
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रेलवे की इस सबसे महत्वाकांक्षी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र का पूरा विकास होगा। इसके तहत हावड़ा से लुधियाना तक 3360 किलोमीटर बनने वाले लंबी रेल लाइन पूर्वी और पश्चिमी तटों को उत्तर भारत से जोड़ेगी। एक लाख करोड़ की लागत वाली डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के साल 2021 तक पूरा होने की संभावना है। कॉरिडोर वाया मुगलसराय जिले के जिवनाथपुर, चुनार, डगमगपुर, झिगुरा, बरकछा, विध्याचल, जिगना होते हुए इलाहाबाद के रास्ते कानपुर तक बनेगी। इससे यात्री ट्रेनों को जगह-जगह खड़ी होकर मालगाड़ी को पास देने से मुक्ति मिलेगी। इस योजना के लिए एक सौ 21 गांव में चार सौ 97 हेक्टेअर भूमि ली गई थी। जिसमें से 52 हेक्टेअर सरकारी व चार सौ 45 हेक्टेअर निजी भूमि थी। योजना के लिए चार सौ 74 हेक्टेअर भूमि पहले ही उपलब्ध करायी जा चुकी थी। 22 हेक्टेअर भूमि जलभराव के कारण उपलब्ध नहीं कराई जा सकी थी। जिससे वह शेष थी, जिसे 25 नवंबर को उपलब्ध करा दिया गया। जिन छह गांव की भूमि उपलब्ध करायी गई थी। उसमें करहट, देवरिया, बरईपुर, मकईपुर, जमालपुर व गोरखपुर माफी शामिल हैं। अभी हाल में ही इसके लिए वीसी कर अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई थी।
मुख्य विकास अधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए जिले के छह गांवों में 22 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहण किया गया है। कार्यदायी संस्था को जमीन का कब्जा दिलाया जा चुका है।
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