कछवां। मंगलवार सूरत से कछवां दिव्यांग रिंकी ने पुलिस के आगे अपना दु:खड़ा सुनाया। पति और दो बच्चों के साथ पहुंची रिंकी ने कहा टिकट के नाम पर छह सौ की जगह 2200 रुपये वसूल गए। रोती हुई दिव्यांग रिंगी, प्रशासन के उन बड़े ठेकेदारों को कोस रही थी जो सही तरीके से व्यवस्था नहीं दे पाए।
दिव्यांग व बेबस माता, पिता अपने दो बेटे को लेकर सूरत से मिर्जापुर और मिर्जापुर से कछवां तक करीब 1600 किलोमीटर का सफर दूध मुंहे बच्चे को दूध के बजाए चीनी का घोल पिलाकर पहुंचे। कछवा क्षेत्र के जमुआ गांव निवासी अजय कन्नौजिया रोजगार की तलाश में अपनी दिव्यांग पत्नी के साथ सूरत गया था। अजय सूरत में लांड्री का कार्य करता था। कुछ दिन काम धंधा ठीकठाक चला लेकिन लॉकडाउन के चलते काम धंधे सब बंद हो गए। जो रुपये बचाकर रखे थे, वह भी खत्म होने लगे। इसलिए घर लौटने का निर्णय लिया। प्रशासन की ओर से सभी मजदूरों को घर भेजने के लिए आनलाइन टिकट बुकिंग चल रहा था। जिसमें दलालों के माध्यम से दो से चार गुने दाम पर टिकट दिए गए। यात्रा के दौरान ट्रेन में कुछ खाने-पीने तक की व्यवस्था नहीं थी।