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तुलसीदास की रचनाएं प्रासंगिक

Sun, 23 Aug 2015 12:48 AM IST
ब्यूरो मिर्जापुर अमर उजाला
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विभिन्न संगठनों की ओर से शनिवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। इस दौरान विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने तुलसी दास  के पदचिह्नों पर चलकर सभ्य, अनुशासित समाज की संकल्पना को पूूर्ण करने का आह्वान किया।
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अखिल भारतीय ब्राम्हण कल्याण संस्थान की ओर से नगर के रमईपट्टी स्थित मंगलम वाटिका में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।  बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सचिव अरूण चंद्र पांडेय ने कहा कि आज तुलसीदास के ग्रंथों का महत्व पूर्व की भांति समाज में प्रशंसनीय है। प्रदेश अध्यक्ष सुनील पांडेय ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन त्याग, भक्ति भावना को समर्पित रहा। जिलाध्यक्ष नागेंद्र नाथ दूूबे ने उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान राजेंद्र त्रिपाठी, अखिलेश तिवारी आदि मौजूद रहे।

जीडी बिनानी पीजी कालेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पं. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि गोस्वामी जी का नाम लेते ही मानव समाज के जीवंतता एवं समग्रता का परिचय मिलने लगता है। अध्यक्षता प्राचार्य डा. राजीव अग्रवाल और संचालन डा. सच्चिदानंद त्रिपाठी व ध्रुव जी पांडेय ने किया। इस दौरान डा. अरविंद मिश्र, राजन पाठक,  डा. नागेंद्र द्विवेदी, डा. रेखा  मौजूद रहे।
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उधर नगर के तिवराने टोला स्थित गुडमार्निंग स्कूल में तथा केएमपीजी कालेज में गोस्वामी तुलसीदास के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। गुडमार्निंग स्कूल में बच्चों ने सुंदरकांड का पाठ किया, केएमपीजी कालेज में प्राचार्य डा. ओमप्रकाश मलिक ने तुलसी की रचनाओं पर से प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत सुनील कुमार पांडेय ने किया।
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