हलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म और एससी-एसटी मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट बलजोर सिंह ने दोष सिद्ध पाते हुए आरोपी को 10 वर्ष के कारावास तथा 22 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर आठ माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। हलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने तहरीर देकर बताया कि उनके पति की 15 वर्ष पहले मौत हो गई थी। वह बगीचा में लकड़ी लेने गई थी। वहां साधू उर्फ सुरेंद्र मौर्या आ गए। उसने जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। परिवार के लोगों से बात बताने के लिए कहने पर कहा कि शादी करके घर में रखूंगा। उसकी बात पर विश्वास करके किसी को नहीं इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच वह शारीरिक शोषण करता रहा। जिससे वह गर्भवती हो गई। शादी की बात करने पर 50 हजार रुपये लेकर चुप बैठने को कहा।
17 अक्तूबर 2013 को महिला ने आरोपी के घर इस मामले की जानकारी दी। वहां धमकी दी गई कि बच्चा गिरवा दो नहीं तो जान से मार दिया जाएगा। छह नवंबर को पुत्री पैदा हुई। राज्य महिला आयोग के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुुआ। पुलिस ने दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन अधिकारी अजय कुमार यादव और विशेष लोक अभियोजक प्रदीप कुमार ने गवाहों के बयान और साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत कर आरोपी को कड़ी सजा दिए जाने की अपील की। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट बलजोर सिंह ने दोषी पाते हुए आरोपी साधू उर्फ सुरेंद्र मौर्या को 10 वर्ष के कारावास और 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।