लालगंज। 171 किलोमीटर लंबे मिर्जापुर-रीवा रेलमार्ग का सर्वे पूरा होने के बाद भी यह आज तक चालू नहीं हो सका। नागरिकों ने मध्य प्रदेश के सांसद व रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिलकर ज्ञापन सौंपा था और इसे शुरू कराने की मांग की थी। सर्वे और जनप्रतिनिधियों के सारे प्रयास के बाद भी दोनों प्रांतों के यात्रियों के सपने धरातल पर उतरते नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। पिछले 20 वर्षों से मिर्जापुर- रीवा रेल में रेल मार्ग निर्माण करने की मांग जारी है। जनता की इस मांग पर वर्ष 2005 में रेल मंत्रालय ने सर्वे कराया था। इसके बाद 2017-18 में भी 680 करोड रुपए खर्च करने के बाद 171 किलोमीटर रेल मार्ग का फाइनल सर्वे पूरा किया जा चुका है लेकिन रेल विभाग की अनदेखी के कारण उत्तर प्रदेश के बॉर्डर के जिले मिर्जापुर विंध्याचल रीवा की रेल मार्ग प्रक्रिया को गति नहीं मिल रही है, जो मिर्जापुर रीवा मध्य प्रदेश वासियों को रास नहीं आ रही है। इस रेलमार्ग की मांग मध्यप्रदेश विधानसभा में कई बार वहां के विधायकों ने भी उठाया था। इस क्रम में मध्य प्रदेश के सांसद जनार्दन प्रसाद मिश्र ने रेल मंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपकर के फाइनेंस विभाग के संस्तुति के लिए सिफारिश की थी। इस रेल पथ निर्माण का दायित्व प्रयागराज मंडल को मिला है। रेल पथ निर्माण में हो रहे विलंब पर सामाजिक कार्यकर्ता हरिशंकर मिश्रा और पूर्व प्रमुख जय कुमार सिंह का कहना है कि इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की अनदेखी जनहित में ठीक नहीं है। आधुनिक दौर में यातायात की सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपरौध अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष प्रभुनाथ दुबे ने कहा कि मिर्जापुर रीवा रेल मार्ग निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बनने से कोलकाता से चली ट्रेन सीधी रीवा से दक्षिण भारत चली जाएंगी। उन्हें इलाहाबाद नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।