आजमगढ़ के लाल बिहारी मृतक पर बनी फिल्म कागज की हर तरफ चर्चा है। सच्ची घटना से प्रेरित होने की वजह से फिल्म लोगों को पसंद भी आ रही है। फिल्म बनने के बाद सरकारी तंत्र की लापरवाही से जिंदा व्यक्ति को कागजों में मुर्दा दिखाने का मुद्दा भी चर्चा में है। ऐसी ही हकीकत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के सत्तर वर्षीय बुजुर्ग रघुनाथ प्रसाद गुप्ता की है।
तीन दिन पहले बैंक में पेंशन के पैसे निकालने गए बुजुर्ग रघुनाथ को कैश काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने बताया कि आप तो मर चुके हैं और इस वजह से आपका खाता बंद कर दिया गया है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन भला क्या गुजरी होगी?
विकास खंड कोन के बुजुर्ग रघुनाथ को जीते जी सरकारी कागजों में मृतक बना दिया गया है। जीवित रघुनाथ जब इंडियन बैंक की चील्ह शाखा पहुंचे तो बैंक कर्मचारियों ने बताया कि वह तो मृतक हो गए हैं। उनका खाता भी बंद कर दिया गया है। वे हताश हो गए और अपने को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी विभागों के चक्कर लगाने लगे।
उनका आरोप है कि सरकारी मशीनरी ने उनको कागजों में मार डाला। लोगों ने उन्हें सलाह दी कि आप ऊपर के अधिकारियों को अपने जिंदा होने की सूचना व सबूत प्रार्थना पत्र के माध्यम से दें। मंगलवार को रघुनाथ ने कोन ब्लाक मुख्यालय पहुंचकर खंड विकास अधिकारी, एसडीएम अमित शुक्ला को प्रार्थना पत्र देकर अपने को जिंदा घोषित करने की मांग की और पेंशन को चालू कराकर खाते में डालने की मांग की। वृद्ध ने कहा कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर जिलाधिकारी के सामने अनशन करना पड़ेगा। जीवित वृद्ध को मृत घोषित कर पेंशन रोकने के मामले में ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी को कई बार फोन किया गया पर नहीं उठा।
एसडीएम व प्रभारी बीडीयो विकास खंड कोन अमित शुक्ला ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र दिया है जिसकी जांच कराई जाएगी। जिनके द्वारा भी मृतक घोषित किया गया है उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।