मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में अमृत योजना के तहत समानांतर चल रहीं 400 करोड़ की सीवर लाइन और पेयजल परियोजना का काम आखिरी चरण में पहुंचकर रुक गया है। दोनों का काम खत्म होने के बाद भी घरों को कनेक्शन नहीं दिए गए। इससे परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी आमजन को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्यदायी संस्था का कहना है कि कनेक्शन का प्रस्ताव कार्ययोजना में नहीं था। अब इसके लिए अलग से बजट मांगा गया है। दोनों का काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कर रही है। नगर में 210 करोड़ की लागत से नगर में 203 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। वहीं, विंध्याचल में 50 करोड़ रुपये की लागत से 25 किलोमीटर लंबी लाइन बिछा दी गई है। यही नहीं, मैनहोल और चैंबर भी बनाए जा चुके हैंं। कार्यदायी संस्था ने चैंबर से मेनहोल को जोड़ दिया है लेकिन घरों से कनेक्शन नहीं जोड़े गए। नगर के 38000 घरों के लोग कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने कहा कि लगभग काम पूरा हो गया है। कनेक्शन के लिए कार्यदायी संस्था से बात की जा रही है। मार्च तक यह काम पूरा होने की संभावना है। अमृत योजना के तहत ही 193 करोड़ की पेयजल परियोजना भी लगभग पूरी हो गई है। इसके तहत पंप के जरिये गंगा से पानी खींचकर जल शोधन संयंत्र में भेजकर शुद्ध होने के बाद ओवरहेड टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। उसके बाद पाइप लाइन के जरिए 38000 घरों को शुद्ध जल की आपूर्ति की जानी है। इसके लिए शास्त्री सेतु के पास बने जल शोधन संयंत्र से गंगा का पानी लिया जा रहा है और उसको शोधित कर लालडिग्गी के जल शोधन संयंत्र तक पहुंचाने का काम शुरू हो गया है। इसके लिए यहां 60 एमएलडी का संयंत्र बनाया गया है। यहां से पानी को शोधित कर पाइप लाइनों के जरिए नगर में बने दूसरे शोधन केंद्रों तक पहुंचाया जाना है। उसके बाद वहां से ओवरहेड टैंकों के जरिए घरों में पानी की आपूर्ति की जाएगी। ये काम पूरे होने के बाद भी घरों में पेयजल के कनेक्शन नहीं दिए गए।