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प्रेमचंद गांव व गरीबो के बीच रहकर लेखन कार्य करते रहे

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मिर्जापुुर। कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती पर शनिवार को साहित्यिक संस्था डॉ. भवदेव पांडेय शोध संस्थान की ओर से नगर के बूढ़ेनाथ स्थित जलज नेत के आवास पर मुंशी प्रेमचंद काल के किसान और आज के किसान विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद गांव और गरीबों के बीच रहकर लेखन कार्य करते रहे।
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अध्यक्षता करते हुए डैफोडिल्स स्कूल के वाइस प्रिंसिपल अरविंद अवस्थी ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत की राष्ट्रव्यापी गुलामी के दौरान गांव-गांव में विदेशी शासकों की जी-हुजूरी करने वाले जमींदार किसानों का भरपूर शोषण करते और उनसे बेगारी लेते थे। उन्होंने गोदान उपन्यास के होरी और उसके पुत्र गोबर के बीच संवाद का उल्लेख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र पांडेय ने कफ़न कहानी का जिक्र करते हुए भूखे व्यक्ति के बीच अविश्वास का उल्लेख किया। गोष्ठी में संतोष श्रीवास्तव, विश्वजीत दुबे, शिव शुक्ल आदि ने किसानों की दयनीय हालत पर चर्चा की। इस मौके पर संदर्भ पांडेय, रवि कुमार यादव, तौसीफ अहमद, कमल पांडेय, सुधीर कुमार, प्रियंका, हंसा यादव आदि ने मुंशी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इसी तरह अखिल भारतीय कायस्थ महासभा और संतोष सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को राज्यलीला कार्यालय में महान कथाकार और उपन्यासकार सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। प्रेमचंद का साहित्य और आज का समय विषयक गोष्ठी हुई। संस्थान के श्रीश श्रीवास्तव ने प्रेमचंद का जीवन परिचय दिया। कहा मुंशी जी ने पूूरे जीवन गरीबों, शोषितों, पीड़ितों, दलितों और महिलाओं की वकालत की। कायस्थ महासभा के जिलाध्यक्ष रत्नेश श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद एक ऐसे लेखक रहे, जो गांव और गरीबों के बीच रहकर लेखन कार्य करते रहे। डॉ. अरविंद श्रीवास्तव, पंकज, शिवम, शरदचंद श्रीवास्तव, केबी लाल, वीरेंद्र श्रीवास्तव आदि ने विचार रखे। इस मौके पर आरती, अर्चना, शिखा, रितुराज, युवराज और गोपाल आदि मौजूद रहे।
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