कभी लोकल फाल्ट तो कभी इमरजेंसी के नाम पर जिले में की जा रही बिजली कटौती से जनजीवन बेहाल हो गया है। रोस्टर के मुताबिक रमजान माह में ग्राम्यांचलों में 14 तथा शहरी क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति किए जाने का रोस्टर निर्धारित है, लेकिन बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई निर्धारित समय नहीं है। इन दिनों रोजाना हो रही रात्रि कालीन बिजली कटौती से लोग पूरी नींद सो नहीं पा रहे हैं।
जिले के ग्रामीण अंचलों सहित नगरीय इलाकों की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बेपटरी हो गई है। जनपद के चुनार, लालगंज, मड़िहान सहित सदर तहसील क्षेत्र में बिजली की हो रही अघोषित कटौती से उमस भरी गर्मी में लोग पसीने पसीने हो रहे हैं।
सुबह, दोपहर, शाम, रात और आधी रात के बाद बिजली की बेहिसाब कटौती से लोगों का हाल बेहाल है। रात्रि कालीन बिजली की कटौती से जहां लोगाें की रातों की नींद हराम हो रही है, वहीं दिन के समय बिजली कटने से उद्योग-धंधों पर गहरा असर पड़ रहा है।
ताबड़तोड़ बिजली कटौती से इनर्वटर भी ठीक ढंग से चार्ज नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण बिजली कटने पर पंखे, फ्रिज, कूलर, एसी सहित बिजली से चलने वाले सभी उपकरण शो-पीस बन कर रह गए हैं।
विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का आलम यह है कि हल्की हवा चलने के बाद विद्युत आपूर्ति ठप कर दी जाती है। रात के समय बिजली कटते ही लोग उमस के कारण लोग घराें से निकल कर छतों, बारजाें, गलियों व सड़कों पर आ जाते हैं। माहे रमजान में अघोषित बिजली कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी रोजेदारों को उठानी पड़ रही है।
बिजली नहीं रहने से रोजेदारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।