नियमिति दिनचर्या ठीक न होने व व्यायाम न करने तथा खान पान पर ध्यान नहीं देने से जिले की आबादी का एक प्रतिशत हिस्सा मधुमेह की चपेट में आ चुका है। सुगर की चपेट में आए लगभग ढाई लाख लोग इंसुलिन की दवा लेने को बाध्य हैं। यह दावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी यह भी मानते हैं कि अगर मधुुमेह का रोगी अपनी दिनचर्या ठीक रखे तो इसका बहुत ज्यादा उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन लापरवाही की तो यह रोग दीमक की तरह पूरे शरीर को खोखला कर देगा। जिसके बाद संभलना मुश्किल होगा।
किसी भी व्यक्ति को मधुमेह रोग जल्द नहीं होता है। अधिकांश लोगों को उनके परिवार से ही यह रोग मिलता है। अगर उनके परिवार में दादा दादी व माता पिता को होता है तो ऐसा माना जाता है कि उनमें ही यह रोग मिल सकता है। बहुत कम लोग ऐसे होंगे जिनकी दिनचर्या ठीक नहीं होने के चलते वह मधुमेह रोग की चपेट में आते हैं। जिले में इस समय लगभग 25 लाख की आबादी है। जिसका एक प्रतिशत हिस्सा 25 हजार लोगों से अधिक की आबादी मधुमेह रोग से पीड़ित हो चुकी है। इस रोग की चपेट