जिले के गरीब परिवारों के बच्चों को जिले के शीर्ष दस निजी स्कूलों में पढ़ाया जाएगा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों से शिक्षा विभाग ने अपने बच्चों के नाम का पंजीकरण कराने को कहा है। पंजीकरण आनलाइन किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने इस बार शिक्षा अधिकार अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देनी है। प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए इस बार बेसिक शिक्षा विभाग ने आनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की है।
प्रदेश सरकार द्वारा नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की कवायद की जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा जिले के टॉप टेन मान्यता प्राप्त अशासकीय, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर कक्षा एक अथवा पूर्व प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में प्रवेश कराया जाएगा।
अनुसूचित जाति व जनजाति अथवा पिछड़ा वर्ग के अभिभावक, कैंसर, एचआईवी पीड़ितों और निराश्रितों केबच्चों का प्रवेश हो रहा है। इसी प्रकार दुर्बल वर्ग में एक लाख से कम वार्षिक आय, विकलांगता, वृद्धावस्था और विधवा पेंशनधारक और बीपीएल कार्डधारकों के बच्चों को प्राथमिकता पर प्रवेश दिलाया जाएगा। पिछले साल जिले में महज 498 छात्रों का ही प्रवेश कराया गया था। अभिभावकों से तीन विद्यालयों का विकल्प मांगा जा रहा है, जिसमें किसी एक में प्रवेश कराया जाएगा।