तीन दिन तक उक्त मुसाफिर को रिक्शा चालक राम भरोसे खूब घुमा फिरा रहा था। वह मुसाफिर को एक क्लीनिक पर लेकर गया। रिक्शे के सहारे वह बदनाम गली पहुंचा जहां वह रुपा नामक कॉल गर्ल से मुलाकात किया। मुसाफिर खूब घूमने-टहने के बाद रामभरोसे को बगैर पारिश्रमिक दिए गायब हो गया।
उसके जाने के बाद रामभरोसे सोंच विचार में पड़ा ही था कि अचानक उसकी निगाह सीट पर पड़े एक बैग पर टिक गई। रामभरोस बैग देखकर उसे बिना खोले इमानदारी का परिचय देते हुए पुलिस को सुपुर्द किया। बैग में उतना पैसा था जितना रामभरोस जीवन भर नहीं कमा पाता। उसकी ईमानदारी को देख पुलिस वाले भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे।