कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने की। मुख्य अतिथि जूनागढ़ अखाड़े की नागकुटी के महंथ स्वामी योगानंद गिरी रहे।
मंगलवार की रात विंध्यधाम के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत संगीत के शीर्षस्थ पुरुष पं. महेश्वपति त्रिपाठी के शिष्य मनीष शर्मा,कार्तिकेय पांडेय, आदित्य पांडेय तथा सुंदरम उपाध्याय ने कथक नृत्य से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गाइए गणपति जगबंदन के साथ गणेश वंदना की गई। घुघंरू बंधे पांवों की प्रस्तुति जो बैठे चरणों में तुम्हारे उसे वाणी का वरदान मिले से कार्यक्रम ऊंचाइयों पर पहुंचता दिखा।
महेश्वर पति त्रिपाठी द्वारा रचित चिठिया ले जा रे, जाके कन्हैया से कहियो की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।
रेखा,सोनी, शालिनी तथा बिंदु ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में बैठे श्रोता अंतिम समय तक अपनी जगह से नहीं हिले। नान पर सोनू पाठक, ढोलक पर रंगू, की बोर्ड पर दुर्गेश, पैड पर प्रकाश ने अपनी अगुंलियों का जादू प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सलिल पांडेय, बाल संत सुधानंद गिरी, मूर्खानंद गिरी, सरोज जायसवाल, भारती गुप्ता, सुनील कुमार आदि उपस्थित रहे।