विंध्य दरबार में मां के कमलनयनी स्वरूप का दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भोर में मां की मंगला आरती होने के बाद से ही दर्शनार्थियों ने बड़े ही श्रद्धा भाव से मत्था टेका।
मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन करने को देर रात तक नर-नारियाें का तांता लगा रहा। घंटा-घड़ियाल, नगाड़े, शंख व जगत जननी के जयकारे से पूरा विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था।
वासंतिक नवरात्र के पंचमी और षष्ठी तिथि पर माता विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को श्रद्धालुआें का हुजूम उमड़ पड़ा।
बुधवार की भोर से ही विंध्याचल की सातों गलियां माता के भक्ताें से पटी रहीं। विंध्यधाम की तरफ जाने वाली सभी गलियाें में भक्त हाथ में गुड़हल व गुलाब के माला के साथ ही नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए मां का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़े जा रहे थे।
विंध्याचल मंदिर में देश के कोने-कोने से आए विंध्यधाम पंहुचे नर-नारियों व बच्चे माता की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखे।
मां विंध्यवासिनी की आरती के समय कपाट बंद होने पर कतार में खड़े श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों पर बैठकर कपाट खुलने का इंतजार करते रहे।
मां की भव्य आरती व पूजन के समय का अलौकिक दृश्य अद्भुत छटां बिखेर रहा था।
मंदिर पहुंच कर किसी ने घंटाें कतार में खड़े रहने के बाद गर्भगृह में पहुंच कर मां के भव्य स्वरूप का दर्शन किया तो किसी ने झांकी के माध्यम से माता का दर्शन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
मंदिर के छत पर दिन भर मुंडन संस्कार कराने का भी दौर चलता रहा।