ड्रमंडगंज। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित हलिया ब्लाॅक के लहुरियादह गांव में पेयजल संकट का स्थाई समाधान नहीं हो पाने के कारण ग्रामीण टैंकर के पानी से प्यास बुझाने को विवश हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि भीषण गर्मी में करीब बारह सौ की आबादी वाले इस गांव का एकमात्र जलस्रोत पानी का झरना भी सूख गया है। ऐसे में अब लोगों का जीवन पूरी तरह से टैंकर के पानी पर आश्रित हो गया है। देवहट ग्राम पंचायत का लहुरियादह गांव ड्रमंडगंज घाटी के ऊपर स्थित है। गांव में कोल, धरिकार, यादव, पाल तथा कुछ केशरवानी समाज के लोग स्थाई रूप से निवास करते हैं। गांव में एक भी भूमिगत जल स्रोत न होने के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या 12 महीने टैंकर से होने वाले पानी की आपूर्ति पर ही निर्भर रहती है। वर्तमान में देवहट ग्राम पंचायत की ओर से लहुरियादह गांव में प्रतिदिन आठ टैंकर पानी की आपूर्ति की जा रही है। लहुरियादह गांव में औसतन प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन तीस लीटर पानी से ही चौबीस घंटे तक का कामकाज पूरा करना पड़ता है। मवेशियों की जरूरत भी इसी में शामिल है। लहुरियादह के निवासी हरिलाल धरिकार, लक्ष्मण दास केसरी, राम कैलाश यादव, जगिलाल यादव, रामनाथ यादव, कुसुम यादव आदि ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल समस्या का स्थाई समाधान न हो पाने के कारण लोगों को साल भर पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लहुरियादह गांव को पेयजल संकट से उबारने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर अमलीजामा पहनाना होगा, तभी लोगों को पानी की समस्या से निजात मिल पाएगी।
उधर, वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों की परेशानी को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने गंभीरता से लिया था। उन्होंने न केवल उस क्षेत्र का दौरा किया, बल्कि समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को बृहद कार्ययोजना बनाने का निर्देश भी दिया। साथ ही अस्थाई तौर पर पेयजल आपूर्ति के लिए भी निर्देश दिया। इस संबंध में देवहट के ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता का कहना है कि जिलाधिकारी के प्रयास से जल जीवन मिशन के तहत लहुरियादह गांव में जलापूर्ति की पाइप लाइन बिछाने के लिए 13 करोड़ रुपये की कार्ययोजना वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजी गई है। तब तक के लिए गांव में प्रतिदिन आठ टैंकर पानी की नियमित आपूर्ति की जा रही है।