पिछले तीन दिन से पड़ रही कड़ाके की ठंड कम होने का नाम नहीं ले रही है। घने कोहरे, गलन व ठिठुरन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बुधवार को पूरे दिन भगवान भास्कर के दर्शन नहीं देने से शीतलहर अपने चरम पर रहा। घने कोहरे के बीच बर्फीली हवाएं मनाली जैसा एहसास करा रही थीं।
हाड़ कंपाती सर्दी ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया, वहीं बूंदाबांदी बंद होने से सड़कों व बाजारों में चहल-पहल बनी रही। मंगलवार को हुई रिमझिम बरसात के चलते मटर व मिर्च की तुड़ाई नहीं हो पाई, जिसके चलते सब्जियों के दाम में इजाफा देखा गया। नगर पालिका प्रशासन की तरफ से नगर में अलाव जलवाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन वह पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। इस वजह से लोगों ने खुद के स्तर पर जगह-जगह अलाव जलवाने का प्रबंध किया था।
मौसम का मिजाज अचानक बदलने से किसानों के चेहरे तो खिल गए, लेकिन सर्द हवा के झोंकों ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। ठंड की वजह से सड़क के किनारे लगने वाले ठेले-खोमचे और रिक्शाचालक भी इक्का-दुक्का ही नजर आए। सुबह से दोपहर बाद तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से ठिठुरन ज्यादा रही। शीतलहर के चलते अलाव जलाने के लिए जलवानी लकड़ी व कोयले की दूकानों पर ग्राहक डटे रहे। वहीं आवश्यक कार्यवश घरों से बाहर निकलने वाले लोगों ने शरीर को जैकेट व स्वेटर सहित शाल, मफलर, दस्ताना, टोपी आदि से ढ़क रखा था।
शीतलहर के चलते से जनपद के ग्रामीण अंचलों के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लोग समूह में बैठकर अलाव तापते नजर आए।