फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

या हुसैन की सदाओं से गूंजा कर्बला, ताजिए दफन

Mon, 02 Oct 2017 12:48 AM IST
mirzapur news
विज्ञापन
ताज‌िया कर्बला की ओर
विज्ञापन
 इमाम चौकों से निकले ताजिए नगर में विभिन्न मुहल्लों से होते हुए ताजिया फत्ते खां के बाड़ा पर एकत्रित हुए। वहां से कतारबद्ध होकर ताजियादार ताजिए लेकर इमामबाड़ा के लिए रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह अखाड़े भी दिखाए गए। कर्बला इमामबाड़ा में ताजिया दफन किए गए। तो सबकी आंखें नम हो गईं। रास्ते में तमाम जगहों पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।  
विज्ञापन

नवीं मुहर्रम को ताजियादारों ने ताजिया इमाम चौकों पर रखा और हजरत इमाम हुसैन को याद किया। नगर के गोसाई तालाब, घोड़े शहीद, रामबाग, पूरी कटरा, अमानगंज, लालडिग्गी, तरकापुर, वासलीगंज, मकरीखोह, रानीबाग, रतनगंज, छोटा मीरजापुर, हयात नगर, नटवां, शबरी, भैसहिया टोला आदि मुहल्लों से मुस्लिम बंधुओं के द्वारा ताजिया लेकर फत्ते खां के बाड़ा में एकत्रित होने के बाद वहां से कतारबद्ध होकर कर्बला इमामबाड़ा के लिए रवाना हुए। इस दौरान कई स्थानों पर शर्बत पिलाने की व्यवस्था की गई थी। तमाम इमाम चौकों पर रात में तकरीर भी हुई। इमाम हुसैन की याद में मंकबत, नौहां एवं मर्सिया पढ़े गए। कर्बला इमामबाड़ा पहुंच कर ताजिया को दफन किया गया। इस दौरान सुरक्षा के जबरदस्त बंदोबस्त किए गए थे।
चुनार की सबसे बड़ी कदम शरीफ की ताजिया इमाम चौक से उठने के बाद कोतवाली चौराहे पहुंचा। जहां अन्य इमाम चौक के ताजियादार ताजिया के साथ शामिल हुए। इस दौरान ताजियादारों ने विभिन्न करतब दिखाए। सायं काल दरगाह शरीफ स्थित कर्बला में ताजिया दफन किये गए। अदलहाट क्षेत्र के कोल्हुआ, देवलासी, भलवां, कमालपुर, शाहपुर, निजामुद्दीनपुर, हाजीपट्टी, छोटा मीरजापुर में ताजिया दफन किए गए। गरौड़ी कर्बला पर पथरौरा, शिवपुर, हाजीपुर, रसूलपुर , खजुरौल , भरूहियां , गरौडी के ताजिए दफनाए गए। भुईली खास कर्बला पर सुरहां, दौलताबाद, जफराबाद, रामपुर, भाईपुर खुर्द के ताजिया दफन हुए।  नगर पंचायत कछवां में मुहर्रम के जुलूस में इस बार फिर बढ़ई की बड़ी मस्जिद ताजिया आगे रही। पिछले साल बड़ी मस्जिद का ताजिया आगे रखने का फैसला किया गया था।  
विज्ञापन


 भाईचारे का मिसाल                                           
राजगढ़। मुहर्रम पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। ताजिया को हिंदुओं ने भी अपने कंधे पर उठा कर कर्बला तक पहुचाया। मुख्तार अहमद, अलीजान, मोइन अहमद, मुहमद अब्बास, अनवर, तुलसी राम, लालता प्रसाद आदि रहे।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें