मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल के रक्तकेंद्र में मरीजों को एसडीपी उपलब्ध कराने के लिए 22 सितंबर को एसडीपी मशीन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद एक रक्तदाता ने डोनेट किया। फिर मशीन खराब हो गई। अब एसडीपी के लिए जरुरतमंदों को वाराणसी जाना पड़ रहा है। दो साल पहले मंडलीय अस्पताल में मशीन लगाई थी। इंस्टॉलेशन और लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने में एक साल से अधिक का समय लग गया था।
अमर उजाला ने मरीजों की समस्या को प्रकाशित किया तो 22 सितंबर को लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने के बाद मशीन का संचालन शुरू हुआ। इसके बाद विंध्य फाउंडेशन क्लब के अध्यक्ष कृष्णानंद हैहयवंशी ने एसडीपी दान किया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार सिंह ने मशीन का शुभारंभ किया था। एसडीपी के लिए आठ हजार रुपये कीमत तय की गई थी।
कम प्लेटलेट्स वाले मरीजों को पड़ती है एसडीपी की जरुरत
जिन मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी होती है। उनको एसडीपी की जरुरत पड़ती है। पहले इसके लिए जिले के लोगों को वाराणसी जाना पड़ता था। मंडलीय अस्पतला में सुविधा शुरू होने के बाद लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन मशीन खराब होने से समस्या जस की तस बनी है। अब फिर से एसडीपी के लिए लोगों को वाराणसी जाना पड़ रहा है। विंध्य फाउंडेशन के अध्यक्ष कृष्णानंद हैहयवंशी ने बताया कि वह चार डोनर को लेकर गए थे। लेकिन एसडीपी नहीं मिला।
यूपीएस खराब था, मशीन ठीक
मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसके श्रीवास्तव का कहना है कि यूपीएस खराब था। जिसे ठीक करा दिया गया है। जिन लोगों का डोनेशन नहीं हो सका है। उनको बुखार और बीपी की समस्या थी। अभी मशीन ठीक है।