मिर्जापुर। पूर्वांचल में एआरटीओ द्वारा एजेंटों के जरिए वसूूूली के जिस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उसमें मिर्जापुर में 2017 से तैनात एआरटीओ प्रवर्तन की जांच की जा रही है। उस दौरान मिर्जापुर में इंट्री का खुला खेल चलता था। एआरटीओ के सिपाही एजेंटों के माध्यम से वसूली करते थे। भ्रष्टाचार मामले में मिर्जापुर के एआरटीओ का नाम आने से परिवहन विभाग में खलबली मच गई है।
ट्रक संचालकों ने शिकायत की थी कि एआरटीओ और उसके सिपाही एजेंट के माध्यम से वसूली करते हैं। मामले में सबसे पहले गोरखपुर के मधुबनी होटल में छापेमारी की गई थी। मामले में ओवरलोड ट्रकों के संचालन के लिए जिले से प्रवेश करने पर इंट्री लिए जाने के मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। मामले की जांच एसटीएफ से एसआईटी को सौंप दी गई। एसआईटी ने छापेमारी की तो एजेंटों के पास से रजिस्टर्ड और फोन रिकार्ड मिले। इसमें वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर समेत 18 जिले के एआरटीओ को वसूूली की रकम पहुंचाने की जानकारी मिली। इसमें मिर्जापुर में 2017 में तैनात एआरटीओ प्रवर्तन की जांच की जा रही है। एसआईटी को साक्ष्य मिला है कि इंट्री के लिए एआरटीओं अपने सिपाहियों के साथ एजेंट रखते थे। जो प्रति ट्रक प्रति चक्कर एक हजार से तीन हजार रुपये वसूली करते थे। वसूली होने वाला पैसा एजेंट एआरटीओ के बताए ठिकाने पर पहुंचा देता था।
एसआईटी जिस मामले की जांच कर रही है, वह 2017 का है। उस समय तैनात एआरटीओ प्रवर्तन की जांच कर जा रही है। गोरखपुर में छापेमारी के दौरान ट्रकों से इंट्री के नाम पर वसूली का मामला है। -रविकांत शुक्ला, एआरटीओ प्रशासन