िगत तीन वर्षों से रबी एवं खरीफ की फसल प्रकृति की मार की भेंट चढ़ती जा रही है। कृषक कर्ज लेकर जुताई, खाद-बीज का प्रबंध करते हैं, लेकिन प्रकृति एक ही झटके में सब कुछ उड़ा ले जा रही है। रविवार को हुई बारिश और ओलों ने किसानों के सपनों पर तुषारापात कर दिया। अब किसानों का कर्ज भरना भी मुश्किल हो गया है।
क्षेत्र में ज्यादातर किसान ऐसे हैं, जो सिर्फ खेती के बल पर घर-गृहस्थी, बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी, बीमार होने पर दवा का प्रबंध करते हैं।
विकास खंड जमालपुर के किसान जुलाई से नवंबर तक खरीफ की खेती करते हैं, जो कभी सूखे तो कभी बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। किसान नवंबर से मार्च, अप्रैल तक हाड़तोड़ मेहनत करते हैं कि यदि रबी की फसल सही सलामत घर पर पहुंच गई तो खरीफ में बर्बाद फसल की भरपाई हो जाएगी, लेकिन तीन सालों से किसानों को खरीफ एवं रबी की फसल में बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर होते चले जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, अहरौरा एवं जरगो जलाशय पांच वर्ष से किसानों के साथ दगा कर रहा है। क्षेत्र के किसानों को सरकारी सिंचाई संसाधन भी मुहैया नहीं कराए गए हैं, किसान अपने निजी संसाधनाें से खेती करने को मजबूर हैं। पिछले रविवार और सोमवार को बारिश व ओलावृष्टि होने के बाद किसान अपनी भाग्य पर सिर्फ आंसू बहा रहा है।
कई गरीब किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, जिसको भरना मुश्किल हो गया है। किसानों ने मांग की कि बर्बाद हुई फसलों की क्षतिपूर्ति दी जाए। जमालपुर के प्रगतिशील किसानों का मानना है कि बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से 35 प्रतिशत फसल का नुकसान हो चुका है। अगर गेहूं की कटाई से पूर्व मौसम एक बार फिर इसी तरह से खराब हुआ तो सबकुछ नष्ट हो जाएगा।