बसनई बाजार स्थित स्टेट बैंक के एटीएम के बाहर लगी ग्राहकों की कतार ।
नोटबंदी के 18 वें दिन जिले में कही खुशी तो कहीं मायूसी का माहौल देेखने को मिला। हजार, पांच सौ के नोट बंद होने से जहां उद्योग-धंधे पर मंदी के बादल छाए हुए हैं। दूकानों पर सन्नाटा छाया हुआ है। नोटबंदी के फैसले का कहीं स्वागत हो रहा है, तो कहीं इसका विरोध। रुपये के अभाव में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। जिसके घर शादी पड़ी है वह भी पैसे के इंतजाम नहीं कर पा रहा। लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई जगहों से दो हजार तो कहीं से पांच सौ रुपये लेकर किसी तरह काम चला रहे हैं।
इसके चलते लोगों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही। वहीं नोट बंदी का असर नगरीय इलाकों सहित जनपद के ग्रामीण अंचलों में साफ तौर पर देखा जा सकता है। हजार व पांच सौ नोटों की बंदी से विगत 18 दिनों में कारोबारियों का कारोबार पूर्ण रूप से बैठ गया है। दूकानदार पूरे दिन अपने दूकानों पर बैठकर ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। लगन के मौसम में रेडिमेड कपड़ा, जेवर, इलेक्ट्रानिक सामान, फर्नीचर आदि के दूूकानों पर सन्नाटा छाया हुआ है।
नोटबंदी से जिले के कार्पेट व्यवसाय और पीतल बर्तन उद्योग सहित छोटे-बड़े कारोबारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। विभिन्न बैंकों के एटीएम के नहीं चलने से ग्राहक अपने पैसे के लिए तरसते नजर आ रहे हैं। पैसे के अभाव में जहां मजदूर व गरीब भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं, वहीं रोज कमाकर खाने-पीने वालों को घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। पेट्रोल पंपों पर सौ रुपये का पेट्रोल नहीं मिल पा रहा है।
पंपों पर तैनात कर्मचारी सीधे पांच सौ रुपये का पेट्रोल लेने की बात कह रहा है, वहीं केराना के दूकानदारों द्वारा उधार का सामान देते देते रखा एक तिहाई सामान बिक गया, लेकिन पैसा नजर नहीं आ रहा है। नोटबंदी से सबसे ज्यादा परेेशानी शादी-विवाह वाले घरों में हो रही है। घर के कुछ सदस्य एटीएम के बाहर लगे कतार में खड़े रहते हैं तो कुछ किसी तरह सगे-संबंधियों से उधार लेकर किसी तरह इज्जत बचाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।