जिले में गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू हो गई है, जो 30 जून तक चलेगी। जिले को 62 हजार एमटी का लक्ष्य मिला है लेकिन अब तक छटांक भर खरीद भी नहीं हो सकी है। उधर जिले को चावल (सीएमआर) की रैक नहीं मिलने के कारण मिलों में लगभग 200 करोड़ रुपये का चावल डंप है। चावल का उठान न होने से गेहूं रखने के लिए जिले में जगह ही नहीं है। इससे क्रय केंद्र प्रभारी चिंतित हैं।
जिले में इस बार गेहूं खरीद के लिए 52 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें खाद्य विभाग के 11, पीसीएफ के 22, सहकारी समिति के चार, कर्मचारी कल्याण निगम के चार, नेकाफ के चार, भारतीय खाद्य निगम के दो और एग्रो के पांच सहित कुल 52 क्रय केंद्र हैं। रबी विपणन वर्ष 2016-17 में मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं खरीद के लिए डीएम राजेश कुमार सिंह ने एडीएम वित्त व राजस्व विजय बहादुर को धान खरीद प्रभारी नामित किया है। इनमें से अधिकांश के केंद्र तो खुले ही नहीं हैं। कुछ खुले भी हैं तो बोरा ही नहीं है।
इस वर्ष समर्थन मूल्य 1525 रुपये निर्धारित है। खाद्य विभाग की ओर से मिर्जापुर, कोन, गैपुरा, कछवां, पड़री, लालगंज, हलिया, मड़िहान, राजगढ़, चुनार और अहरौरा में, सहकारी समिति की ओर से चितौली, पथरौर, गुरुदेव नगर और अहरौरा में, कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा मंडी समिति, गोपालपुर, ददरा पहाड़ी राजगढ़, सेमरी में, भारतीय खाद्य निगम की ओर से हलिया और मड़िहान में नेकाफ द्वारा देवरी हलिया, बनवारीपुर और सक्तेशगढ़ में तथा एग्रो की ओर से मंडी समिति बिहसड़ा, राजापुर, बरौंधा और नरायनपुर में क्रय केंद्र खोले गए हैं। इसी प्रकार पीसीएफ ने कुल 22 क्रय केंद्र बनाए हैं।