मिर्जापुर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने निकाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया। अभियोजन अनुसार विंध्याचल कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी युवती का निकाह 2015 में हुआ था। दो माह बाद दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उसके गांव निवासी इरफान हसन ने उसे बहला कर निकाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाया और कहा कि वह सऊदी अरब से लौटने के बाद उसके साथ निकाह कर लेगा। सऊदी से आने पर युवती ने निकाह की बात कही तो युवक व उसके परिवार वाले दहेज में 11 लाख रुपये नकद और कार की मांग करने लगे। इसके बाद युवती ने थाने में निकाह का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने की तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर 164 का बयान कराया। जिसकी जमानत अर्जी आरोपी ने दिया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सच्चिदानंद तिवारी ने जमानत का कड़ा विरोध किया और पक्ष रखा कि आरोपी को पासपोर्ट जमा करना था। पर उसने पासपोर्ट जमा नहीं किया। इसलिए जमानत निरस्त किया जाए। न्यायालय ने समस्त तथ्यों और अपराध की गंभीरता का दृष्टिगत रखते हुए जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।