विंध्याचल। चैत्र नवरात्र की षष्ठी तिथि पर बृहस्पतिवार को माता विंध्यवासिनी की चौखट पर शीश नवाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती और शृंगार पूजन के बाद कपाट खुलते से दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक चलता रहा। गलियां और सड़कें माता के जयकारे से गूंजती रहीं।
गुड़हल, कमल और गुलाब के फूलों से मां का भव्य शृंगार किया गया था। किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर तो किसी ने झांकी से माता की झलक पाकर सुख समृद्धि की कामना की। माता के जयकारे से विंध्य धाम की गलियां गूंजती रहीं। मंदिर छत पर साधक अनुष्ठान में जुटे रहे। त्रिकोण मार्ग पर विराजमान महाकाली के दर्शन-पूजन कर दुर्गम पहाड़ी के रास्ते लगभग ढाई किलोमीटर पैदल सफर कर श्रद्धालु मां अष्टभुजी की चौखट पर पहुंचे। यहां भी भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
मां शीतला और मां चंडिका के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
हलिया/पड़री। नवरात्र को पांचवे दिन गड़बड़ा धाम में मां शीतला और पड़री क्षेत्र के चंडिका माता मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा। सेवटी नदी में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने शीतला माता का दर्शन पूजन किया। मंदिर के पुजारी मंगलधारी ने बताया कि देर शाम तक 40 हजार से अधिक भक्तों ने मां शीतला के दर्शन किए। वहीं, मां चंडिका के दरबार में भोर से रात तक दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। मंदिर के पुजारी मंगलापुरी ने बताया कि इस नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा आ रही है। संवाद