मिर्जापुर। शहर कोतवाली क्षेत्र के घुरहूपट्टी बड़ा डाकखाना के पास बुधवार की सुबह छत पर राड लेकर खेल रही बालिका बालकनी के पास से गुजरे हाईटेंशन तार की चपेट में आ गई। पास खड़ी मां ने जब करंट से बच्ची को तड़पते देखा तो धक्का मारकर पुत्री को तो बचा लिया, पर खुद करंट की चपेट में आ गई। जब तक परिवार के लोग उसे करंट से अलग करते तब तक उसने दम तोड़ दिया। परिजन मां-पुत्री को लेकर मंडलीय अस्पताल आए। जहां डाक्टर ने मां को मृत घोषित कर पुत्री को भर्ती कराया।
नगर के सिविल लाइन स्थित मां शारदा मंदिर के पुजारी वीरेंद्र गुप्ता उर्फ बाबा दिव्यानंद का घुरहूपट्टी बड़ा डाकखाना के पास मकान है। चार फरवरी को उनके तीसरे नंबर के पुत्र की शादी है। घर में मेहमानों का आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरा परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। विरेंद्र गुप्ता का सबसे बड़ा पुत्र अरुण कुमार गुप्ता ई रिक्शा चलाता है। अरुण की पत्नी 32 वर्षीय निम्मी गुप्ता चार वर्षीय पुत्री जेसी के साथ द्वितीय तल के मकान की छत पर थी। छत की बालकनी से एक से डेढ़ फीट दूर ही 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार गुजरा है। निम्मी गुप्ता छत पर कपड़ा साफ कर सुखने के लिए डाल रही थी। इस दौरान उसकी चार वर्षीय पुत्री जेसी छत पर रखे एक लोहे के पाइप को हाथ में लेकर खेल रही थी। खेलते-खेलते मासूम जेसी लोहे का पाइप लेकर छत की बालकनी की ओर बढ़ी, तभी हाईटेंशन तार से गुजर रही 11 हजार वोल्ट करंट पाइप को अपनी ओर खींचने लगा। करंट लगने से मासूम चीखी, तो पास खड़ी उसकी मां निम्मी जेसी की तरफ दौड़ी। पाइप को खिंचना चाहा, पर वह भी करंट की चपेट में आ गई। उसने किसी तरह से धक्का मारकर अपनी पुत्री को दूर किया, पर खुद को नहीं बचा सकी। वह हाईवोल्टेज करंट की चपेट में आ गई। शोर सुनकर जब तक परिजन छत पर पहुंच कर उसे करंट से अलग करते तब तक उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। किसी तरह निम्मी को करंट से अलग करने के बाद परिजन आनन-फानन में मां-पुत्री को उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल लेकर आए। जहां डाक्टर ने मां को मृृत घोषित कर पुत्री को भर्ती कर लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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देवर की शादी से पहले भाभी की मौत से छाया मातम
मिर्जापुर। पुजारी विरेंद्र गुप्ता को पांच पुत्र है। सबसे बड़ा पुत्र अरुण कुमार गुप्ता, उसके बाद मनीष गुप्ता, दिलीप गुप्ता, विजय गुप्ता और सबसे छोटा दुर्गा प्रसाद है। अरुण और मनीष की शादी हो चुकी है। दिलीप मुंबई में रहकर काम करता है। दिलीप की शादी भटवा पोखरी मोहल्ला निवासी अल्का से तय हुई है। शादी के लिए दिलीप भी मुंबई से आया है। चार फरवरी को दिलीप की बारात स्टेशन रोड स्थित शिवशक्ति लान में जानी थी। शादी करीब होने से परिवार में मेहमानों का आना शुरु हो मगया था। शादी के चलते परिवार में खुशियों का माहौल था। अरुण की पत्नी निम्मी भी देवर की शादी की तैयारियों में जुटी थी कि गुरुवार को हुए दर्दनाक हादसे से खुशियों का माहौल पल भर में मातम में बदल गया। किसे पता था कि घर से देवर की शादी से पहले भाभी की अर्थी उठेगी। बेटी को बचाने में निम्मी की जान ही नहीं गई, बल्कि चार माह के दुधमुहे मासूम सहित चार बच्चों के सिर से मां का साया भी उठ गया। मां की मौत के बाद एक बच्ची जहां अस्पताल में भर्ती है, वहीं अन्य बच्चों आठ वर्षीय पुत्री शिकांशी, छह वर्षीय पुत्र आरस का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं चार माह के मासूम को क्या पता कि अब उसकी मां कभी वापस नहीं आएगी। अचानक हुए इस हादसे से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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घरों के बाहर गुजरे हाईटेंशन तार दे रहे मौत को दावत
मिर्जापुर। सिविल लाइन तिराहे से घुरहूपट्टी-फतहां की ओर जाने वाले रोड पर घरों के किनारे से होकर हाईटेंशन तार गुजरे हैं, जो मौत को दावत दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घर के पास से गुजरे हाईटेंशन तार को हटाने के लिए कई बार बिजली विभाग को कहा गया है, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि बालकनी में खड़े होने पर डर लगता है। पास से गुजरे हाईटेंशन तार से गुजर रहे करंट की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। कई लोगों ने तो द्वितीय के बालकनी की ओर आने वाले दरवाजे पर अंदर से तला लगा दिया है। जिससे कोई बच्चा या अन्य बालकनी पर जाने से तार की चपेट में न आ सके। बिजली विभाग ने तार नहीं हटाया और आखिरकार घरों के पास से गुजरे हाईटेंशन तार के करंट की चपेट में आई पुत्री को बचाने में मां की मौत हो गई। हादसे को लेकर बिजली विभाग के खिलाफ स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है।