2022 के अंत तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद है। सरोगेट मदर के लिए गायों का चयन और उनके स्वास्थ्य के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लगभग 10 महीने का वक्त बछड़े के पैदा होने में लगेगा। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के सहायक आचार्य डॉ उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि लुप्त प्राय उन्नत देशी नस्लों को सरोगेट मदर के माध्यम से संरक्षित व संवर्धित किया जाएगा।
इससे जहां एक ओर अनमोल नस्लें सुरक्षित होंगी तो वहीं दूसरी ओर घुमंतू गायों को सहारा मिलेगा। फसलों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा।पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के डीन प्रो रमादेवी निमन्नापल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय वित्त विकास योजना से पोषित इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 27 करोड़ रुपये है। योजना का उद्देश्य देश की अनमोल उन्नत देशी पशुधन को संरक्षित व संवर्धित करना है। हमारे चिकित्सकों की टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
उन्नत देशी नस्ल की गायों के अंडाणु को उच्च नस्ल के सांड़ों के शुक्राणु से निषेचित कराया जाएगा। इसके बाद तैयार जायगोट को सरोगेट गायों के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाएगा। संकाय के चिकित्सक व प्रशिक्षित स्टाफ गर्भावस्था के नौ महीने नौ दिनों के दौरान गायों की देखभाल करेंगे। गर्भ में पलने वाले बच्चे सरोगेट मदर से केवल संरक्षण व पोषण प्राप्त करेंगे। उनका गुणधर्म समूल रूप से उन्नत देशी नस्लों का होगा।