मिर्जापुर। जिले में मनरेगा पार्क की योजना अधर में लटकी हुई है। लॉकडाउन में प्रवासियों व अन्य ग्रामीणों को मनरेगा से आजीविका देने के लिए इस योजना की शुरूआत की गई थी। कहा गया था कि इससे एक तरफ तो लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को एक स्थान भी मिलेगा, जहां पर सुबह शाम के समय आराम के साथ व्यायाम किया जा सकेगा।
प्रारंभिक चरण में जिले के सभी 12 विकास खंडों में एक-एक मनरेगा पार्क बनाने का निर्णय लिया गया था। यह पार्क ग्राम पंचायत निधि से बनाए जाने थे। इसके लिए विभिन्न मानदंड तय किए गए। विभाग का कहना है कि इसके लिए बजट का कोई निर्धारण नहीं था। इसके बाद भी जिले में मनरेगा पार्क नहीं बन सके। हालांकि विभाग का कहना है कि तीन मनरेगा पार्क बनाए गए थे। इनमें से एक पहाड़ी में, दूसरा जमालपुर व तीसरा लालगंज के उसरी खम्हरिया में बनाया गया। पहाड़ी विकास खंड में खेल के मैदान में व्यायाम के कुछ सामान रखे गए हैं। विकास खंड के कोटवां, सरैयां व सूरजवार में इस प्रकार के मैदान हैं लेकिन जिले के शेष अन्य विकास खंडों में इस प्रकार के मैदान भी नहीं हैं। इससे शासन की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। हालांकि एक लाकडाउन बीत गया और दूसरा भी बीत गया लेकिन मनरेगा पार्क नहीं बनाए जा सके।
पार्क में यह कार्य होने थे
मिर्जापुर। मनरेगा पार्क में कुछ निर्दिष्ट कायों अथवा सुविधाओं को उपलब्ध कराना था। इसमें ओपन जिम, पाथ वे, मार्निंग वाक ट्रैक व पर्यावरण संरक्षण के लिए शोभाकार अथवा औषधीय पौधों का रोपण किया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया जा सका। हालांकि विभाग का कहना है कि अधिकांश जगहों पर काम कराया जा रहा है। अब बरसात हो गई। इसके बाद काम पूरा होगा।
यह पूरा छह महीना चुनाव व अन्य गतिविधियों में बीत गया। इस वजह से कार्य पूरा नहीं हो सका। अब बरसात समाप्त हो रही है। इसके बाद सभी कार्य पूरे होंगे। - मो. नफीस, डीसी मनरेगा