मिर्जापुर। इस बार भी लाकडाउन की चपेट में आने वाले प्रवासी श्रमिक धीरे- धीरे अपने गांवों का रूख करने लगे हैं। इसको देखते हुए जिले में ऐसे प्रवासी श्रमिकों के रोजगार के लिए योजनाएं तैयार होने लगी हैं। मुख्य विकास अधिकारी श्रीलक्ष्मी वीएस की अध्यक्षता में ऐसे लोगों को रोजगार दिलाने के लिए योजनाओं पर काम शुरू हो गया है।
पिछली बार जब लाकडाउन लगा था तो मनरेगा के तहत ऐसे सभी 32 हजार 85 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया था। उनको स्किल मैपिंग कर स्किल्ड, सेमी स्किल्ड व अनस्किल्ड श्रेणी में बांट कर रोजगार उपलब्ध कराया गया था। इस योजना की वजह से जो श्रमिक दूसरे प्रांतों से अपना काम धंधा छोड़कर अपने घर वापस आए थे। उनको कोई समस्या नहीं हुई।
महाराष्ट, दिल्ली व अन्य प्रांतों की स्थिति को देखते हुए अब श्रमिक अपने गांव का रूख करने लगे हैं। इसको देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी श्रीलक्ष्मी वीएस ने डीसी मनरेगा, डीपीआरओ व अन्य अधिकारियों को योजना बनाने का निर्देश दिया है। कहा जा रहा है कि जिन लोगों के पास मनरेगा जाबकार्ड है, उनको काम मुहैया कराया जाएगा। इसके साथ ही बिना जाबकार्डधारकों को प्राथमिकता पर जाबकार्ड बनवाकर काम मुहैया कराने की योजना है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में जिले में मनरेगा में लगभग एक लाख 86 हजार सक्रिय जाबकार्ड धारक हैं। कोविड- 19 के चलते बाहर से आने वाले लोगों की सूची तैयार की जा रही है।
मुख्य विकास अधिकारी वीएस. श्रीलक्ष्मी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैर प्रांतों से प्रवासियों की आने की सूचना है। ऐसे लोगों को मनरेगा के तहत कार्य दिलाने की योजना है।