मर्चेंट नेवी अधिकारी मनीष द्विवेदी की वापसी की मांग के लिए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से मिले परिजन
मिर्जापुर। अमेरिका के पेनसिलवेनिया बंदरगाह से माॅल गया मर्चेंट नेवी अफसर मनीष द्विवेदी का पता लगाने के लिए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। इससे पहले विदेश मंत्रालय और वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास से मामले में हस्तक्षेप कर मनीष द्विवेदी की खोज में सहयोग का अनुरोध किया था। शनिवार को परिजन मिर्जापुर स्थित कार्यालय पर भी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से मुलाकात किए।
अनुप्रिया ने बताया कि पत्र अमेरिका के भारतीय दूतावास में पहुंच गया है। विदेश मंत्री के कार्यालय की ओर से 14 मई के ई-मेल के माध्यम से नई जानकारी दी है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को जानकारी मिली है कि मनीष द्विवेदी को 6 मई 2026 की शाम अनुचित स्पर्श की घटना के कारण डेलावेयर स्टेट पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। उन्हें 25 जून 2026 को डेलावेयर अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। सीमा शुल्क व सीमा सुरक्षा (सीबीवी) ने मनीष द्विवेदी का पासपोर्ट और सीमैन बुक शिपिंग एजेंट से प्राप्त किया है। वाणिज्य दूतावास डेलावेयर पुलिस, सीबीपी, शिपिंग कंपनी और स्थानीय भारतीय समुदाय के संपर्क में है। वाणिज्य दूतावास ने मनीष के पिता से भी बात की। बताया कि उनकी आखिरी बार मनीष से सात मई 2026 को बात हुई थी। उसके बाद से परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा है।
लापता होने वाली रात सीसी टीवी में पैदल जाते दिखा मनीष
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि जांच अधिकारी के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में मनीष द्विवेदी के लापता होने वाली रात काफी समय तक पैदल चलते देखा गया है। शिपिंग कंपनी के एजेंट ने एक वकील और एक निजी जांचकर्ता को भी नियुक्त किया है। मेल में बताया गया है कि परिवार ने सूचित किया है कि मनीष के डेबिट कार्ड का उपयोग छह मई के बाद भी नियमित रूप से किया जा रहा है। हालांकि, एचएसबीसी बैंक की नोएडा शाखा ने गोपनीयता कारणों से ट्रांजेक्शन विवरण साझा करने से मना कर दिया है।
फिरौती का भी मेल आया
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि 12 मई 2026 को एक अज्ञात स्रोत से 2000000 यूरो की फिरौती का ईमेल प्राप्त हुआ था। पुलिस और विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवसरवादी और फर्जी ईमेल हो सकते हैं, जो अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चित मामलों में देखा जाता हैं। वर्तमान में भारतीय दूतावास (वाशिंगटन डीसी) और वाणिज्य दूतावास संघीय एजेंसियों के साथ मिलकर मनीष द्विवेदी की तलाश के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है।