जैसे-जैसे पारा चढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे पानी पाताल की ओर भाग रहा है और प्यास भी गहरी होती जा रही है। जिले के पहाड़ी इलाकों में पीने के पानी का संकट यूं तो महीनों पहले आ गया था लेकिन अब वह और गंभीर हो गया है। हलिया ब्लाक में लोगों को पांच से छह किमी दूर से पीने के लिए पानी लाना पढ़ रहा है। ड्रमंडगंज, लालगंज व पहाड़ी ब्लाक के नदी-नालों, तालाबों में धूल धूल उड़ने लगी है और मवेशी पानी के बिना बेचैन हैं। ऐसे इलाकों में प्रशासन अब तक रोजाना छह टैंकर पानी भेज रहा था, जिसे बढ़कर आठ टैंकर कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने जल निगम से कहा है कि वे स्थिति का आकलन करके टैंकरों की संख्या बढ़ाएं।
हलिया विकास खंड के कई गांवों के ग्रामीणों को साइकिल से छह से सात किलोमीटर दूर भैसोड़ बलाय पहाड़ गांव जाकर पानी लाना पड़ रहा है। भूमिगत जलस्तर तेजी से खिसकने से हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। सबसे गंभीर स्थिति देवहट ग्राम पंचायत के लहुरियादह में है। डेढ़ हजार की आबादी में एक भी जलस्रोत नहीं होने के कारण लोगों को टैंकर के पानी के भरोसे गुजारा करना पड़ रहा है। गांव में जल निगम की ओर से 24 घंटे में छह टैंकर पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन पानी ग्रामीणों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। पानी कम पड़ने पर लोग गहरी घाटी में उतरकर झरना से पानी भरकर लाते हैं लेकिन उसकी हालत भी अच्छी नहीं है।
लोगों का कहना है कि रोजाना 12 टैंकर जलापूर्ति होने पर ही पीने, खाने व नहाने का इंतजाम हो हो सकेगा। कोरावल क्षेत्र के मतवार, नदना, मटिहरा, धमौली, नौगवां, गूलपुर, सरदारपुर, ढीढ़ी, मझिगवां, देवहट, कटरा, भैसोड़ बलाय पहाड़, आदि गांवों में भी पानी की किल्लत है। देवहट के ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि लवकुश केशरी ने बताया कि लहुरियादह में पानी टैंकर के खेप बढ़ाने की मांग की जा चुकी है। जिलाधिकारी विमल कुमार दूबे ने जल निगम को पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने को कहा है।