आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी देवी की पावन जयंती पर श्री विंध्य सेवा मंच के तत्वावधान में बड़े श्रद्धाभाव से श्री विंध्य त्रिकोण शक्ति की आराधना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार बीच श्री शतचंडी महायज्ञ व हवन पूजन के साथ ही पहाड़ स्थित भैरोकुंड पर मां की आराधना यंत्र, तंत्र, मंत्र के माध्यम से 51 विद्वत ब्राम्हणों द्वारा किया गया। मंत्रों से पूरा अष्टभुजा पहाड़ गुंजायमान हो रहा था।
मां अष्टभुजी देवी का संस्था की तरफ से तरह-तरह के फूलों से किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन करने को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। संस्था की ओर से सुबह से देर रात तक भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। आकर्षक फूल-पत्तियों व रंगीन झालरों से अष्टभुजा मंदिर की सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। अष्टभुजा मंदिर के समीप स्थित भैरोकुंड पर मां की आराधना यंत्र, तंत्र, मंत्र के माध्यम से 51 विद्वत ब्राम्हणों ने कराया, वहीं श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्री यंत्र का पूजन-अर्चन तरह-तरह के मेवे और पुष्प के माध्यम से किया गया।
कार्यक्रम के दौरान भक्तों के बीच नीम का पेड़ भी वितरित कर पेड़ लगाने के प्रति प्रेरित भी किया जा रहा था। कार्यक्रम संयोजक त्रियोगी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू मिश्र ने बताया कि नीम के पेड़ में मां विंध्यवासिनी की शक्ति निवास करती है, नीम का पेड़ जहां भी होता है, वहां मां की कृपा बरसती है, इसलिए नीम का पेड़ बांटा गया।
इस दौरान कार्यक्रम संयोजक त्रिवेणी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू सहित पप्पू त्रिपाठी, ओमप्रकाश मिश्र, मुन्नू मिर्जापुरी, ध्रुव नारायण, राजकुमार खत्री, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, रिंकू महाराज, राजकुमार चतुर्वेदी, आलोक पांडेय, राजकुमार श्रीमाली, रतन कुमार मिश्र, ह्दय नारायण, कविता अग्रवाल, नितेंद्र प्रसाद सिंह, शशिकांत मिश्र, मानस मिश्र आदि मौजूद रहे।