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मनरेगा: प्रधान अपने चहेतों को 50 फीसद कमीशन पर दे रहे काम

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हलिया। वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप को देखते परदेश से श्रमिक गांव पहुंच गए हैं। सरकार ने सभी श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए मनरेगा योजना पर जोर दिया। मनरेगा के तहत लोगों को शहर न जाकर गांवों में ही रोजगार देने की बात कही गई। वहीं मनरेगा योजना की जमीनी हकीकत देखी जाए तो सरकार के दावों की धज्जियां उड़ रही हैं। योजना का लाभ श्रमिकों को नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि प्रधान अपने चहेतों को 50 फीसद कमीशन पर काम दे रहे हैं और अन्य श्रमिक बेरोजगार बैठे हैं।
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हलिया के 79 ग्राम पंचायत में 42 हजार श्रमिकों को जॉब कार्ड के आधार पर रोजगार देने के लिए चयनित किया गया था। जॉब कार्ड के आधार पर आठ करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। कोटार गांव निवासी शिव जनक पाल व लवलेश पाल एवं सियाराम पुरवा गांव निवासी दयाराम, राजपुर गांव निवासी कादिर अली का कहना है कि विकास खंड में वर्तमान समय में मनरेगा में काफी खेल चल रहा है। ग्राम प्रधान अपने चहेतों की हाजिरी भर कर आधे पर सौदा कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान मनरेगा श्रमिकों से सार्वजनिक कार्य के बजाए अपना निजी कार्य करा रहे हैं।
एपीओ ज्ञान सिंह का कहना है कि विकास खंड में मनरेगा के तहत श्रमिकों को ग्राम पंचायत स्तर पर चकमार्ग, भूमि समतलीकरण, नाली, तालाब, सड़क चौड़ीकरण जैसे रोजगार देकर भुगतान किया गया है। कार्यों को बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर दबाव के चलते जांच, पड़ताल नहीं की जा पा रही है।
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मनरेगा की कहानी, श्रमिकों की जुबानी
शिव जनक, कोटार का कहना है कि मनरेगा के कार्य में बनाए गए नियमों की धज्जियां ग्राम पंचायतों की ओर से उड़ाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान सार्वजनिक कार्य न कराकर अपने व्यक्तिग कार्य कराते हुए लोगों के खाते में पैसा भेज कर बंदरबांट कर रहे हैं। लाल जी ,सोनगढ़ा ने बताया कि मनरेगा के तहत कैटल सेट में कार्य किया था। चार माह बीत रहा है, आज तक मजदूरी नहीं मिली। मजदूरी को लेकर कई बार बैंक व ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगाया लेकिन अधिकारी खाता की गड़बड़ी बताकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इसके अलावा राजपुर निवासी कादिर अली, हलिया कोटार निवासी लवलेश पाल, भीटहा निवासी सियाराम, हलिया पुरवा निवासी दयाराम ने बताया कि ग्राम प्रधान की मनमानी के चलते गरीबों को मनरेगा के तहत रोजगार नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों की सह पर सिर्फ चहेतों के नाम की हाजिरी भरकर शासन का धन डकार रहे हैं। ग्राम प्रधानों और अधिकारियों व कर्मचारियों का संबंध चोली-दामन का साथ है। चहेतों का ही जॉब कार्ड बनाकर गरीबों का हक छीना जा रहा है। गांव व क्षेत्र में ज्यादातर काम सिर्फ कागजों पर हो रहे हैं। ग्राम प्रधान सिर्फ अपने चहेतों के ही जॉब कार्ड बनाकर न सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं बल्कि अपना व्यक्तिगत कार्य करवा रहे हैं। अपने खेतों में श्रमिकों से इस वक्त धान की रोपाई करवा रहे हैं। जॉब कार्ड तो बना है। गांव में काम मांगने पर भी नही दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान किसी भी कार्य में सिर्फ अपने चहेतों को ही वरियता दे रहे हैं।
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वर्जन
- ग्राम प्रधान के परिवार में जॉब कार्ड होने तथा धन उगाही के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में यदि कोई शिकायत मिलती है तो मामले की जांच पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी।
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-नंदलाल कुमार, बीडीओ, हलिया।
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