छह माह में दो चुनाव, पहले पिता फिर बेटी हारी
शुचिस्मिता मौर्य इसी सीट से 2017 में विस चुनाव जीत चुकी हैं। तब शुचिस्मिता ने बसपा प्रत्याशी डाॅ. रमेश बिंद को हराया था। डाॅ. रमेश बिंद वर्तमान सपा प्रत्याशी व प्रमुख प्रतिद्वंदी डाॅ. ज्योति बिंद के पिता हैं। करीब छह महीने पहले हुए लोस चुनाव में डाॅ. रमेश बिंद को भी हार का सामना करना पड़ा था।
शुचिस्मिता मझवां क्षेत्र की पहली भाजपा प्रत्याशी हैं, जिन्होंने पहले पिता, फिर बेटी को चुनाव में हराया। उन्होंने रमेश बिंद को 41,159 मताें के अंतर से हराया था। डाॅ. रमेश बिंद भी दूसरे स्थान पर थे। अब उनकी बेटी डाॅ. ज्योति बिंद भी दूसरे स्थान पर रहीं।
मझवां विधानसभा सीट पर चुनाव परिणाम आने के बाद कार्यकर्ताओं ने शुचिस्मिता को खिलाई मिठाई।
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आठ प्रत्याशियों से आगे रहा नोटा
मझवां विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में नोटा को भी लोगों ने पसंद किया। मतदाताओं ने आठ प्रत्याशियों से ज्यादा मत नोटा को दिए हैं। 2027 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। इस उपचुनाव में 50.41 फीसदी मतदान हुआ था। शनिवार को 14 टेबल पर 34 राउंड की मतगणना कराई गई। पहले बैलेट पेपर, फिर सर्विस मत गिने गए, फिर ईवीए का स्ट्रांग रूम खोला गया।
निषाद पार्टी को नहीं मिली सीट, भाजपा ने अपने पास रखी
मझवां विधानसभा सीट 2022 में निषाद पार्टी के पास थी। भाजपा के सहयोग से डॉ विनोद बिंद ने चुनाव जीता था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने विनोद को भदोही से लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बना दिया। विनोद चुनाव जीत गए। इस वजह से मझवां सीट खाली हो गई और उपचुनाव हुआ। निषाद पार्टी चाहती थी कि उपचुनाव में भी सीट मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने सीट अपने पास ही रखी। इसी का नतीजा रहा कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद ने चुनाव प्रचार से किनारा कर लिया। सक्रियता से चुनाव प्रचार नहीं किया।