जगतजननी के वार्षिक घटा कार्यक्रम में श्री विंध्य पंडा समाज की पदाधिकारियों सदस्यों, जनता और दूरदराज से आए भक्तजनों ने अपनी हाजिरी लगाई। माता का जयघोष लगाते हुए श्रद्धालु विंध्याचल के पक्का घाट से मिट्टी के घड़े सहित विभिन्न जल पात्र में गंगा जल भर देवी दरबार में जलाभिषेक करने पहुंचे हुए थे।
इसके पूर्व गंगा घाट पहुंचे भक्तों ने गंगा में गोता लगाकर घड़े में पानी भर उस पर माता का नाम एवं ओम स्वास्तिक बनाने के बाद फूल-माला-कलावा बांधकर देवी दरबार में पहुंचे। देवी मां की भक्ति के प्रति श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। माता की जय जयकार की गूंज से पूरा विंध्य परिसर गुंजायमान हो रहा था।
विंध्याचल के घाटों से घड़े में गंगा जल भर अभिषेक करने के लिए विंध्य की गलियां भक्तों से पटी रहीं। भक्तों ने अपने अपने कंधे पर गंगा जल से भरा घड़ा लेकर विंध्याचल धाम पहुंचे, जहां मंदिर के कोने-कोने की विधिवत सफाई की गई। सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक मंदिर में महाघटा अभिषेक कार्यक्रम संचालित किया गया।
मंदिर के वार्षिक कार्यक्रम के तहत भक्तजनों ने 5 से लेकर करीब 51 घड़े में गंगा जल भरकर देवी धाम का अभिषेक किया। तत्पश्चात राजश्री आरती और मां विंध्यवासिनी के भव्य शृंगार के उपरांत मां का कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि मंदिर के वार्षिक महा घटाभिषेक कार्यक्रम के तहत देर रात्रि में मंदिर में विशेष पूजन अनुष्ठान किए जाएंगे। इस मौके पर मंत्री भानु पाठक, कोषाध्यक्ष तेजन गिरी, केदार भंडारी, गौतम द्विवेदी, अजय दूबे
सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु शामिल रहे।