एकादशी तिथि पर विंध्यधाम में दूरदराज से पहुंचे श्रद्घालुओं ने जगत जननी का विधि-विधान पूर्वक दर्शन पूजन कर मंगलकामना किया। घंटा-घड़ियाल, शंख और माता के जयकारे से मंदिर गुंजायमान हो रहा था। गंगा स्नान करने के बाद माला-फूल, नारियल-चुनरी एवं प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे भक्तों ने बड़े ही श्रद्घा भाव से मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। गलियों में लगी कतार में खड़े श्रद्घालु मां की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे। जयकारा लगाते, हाथ में प्रसाद लिए श्रद्घालु नंगे पांव मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद आस्थावानों ने मंदिर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के धाम में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन किया। कोई हवन कुंड का परिक्रमा करने में तल्लीन दिखा तो कोई भक्त मां के मंदिर परिसर में आसन पर बैठकर विधिवत पूजन अनुष्ठान करते दिखाई दिए। विंध्याचल मंदिर के छत पर जहां साधक पूजन-अनुष्ठान में मशगूल दिखे, वहीं लगातार मुंडन संस्कार भी होते रहे। विंध्य दरबार में मत्था टेकने के बाद भक्तों ने नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।