नगर के सटे सिटी ब्लाक के जसोवर पहाड़ी स्थित हजरत हाजी नूर मोहम्मद शाह उर्फ सिपाही बाबा का 15 वां सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। मुबारक उर्स के अंतिम दिन नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें दूरदराज से आए शायरों ने अपने एक से बढ़कर एक कलाम को पेश कर महफिल लूट ली। बाद नमाज फजीर सिपाही बाबा के दरगार पर कुरानख्वानी एवं गुस्ल चादरपोशी हुआ। सिपाही बाबा के दरगाह पर चादरपोशी कर मन्नतें मांगने का दौर अनवरत चलता रहा।
सिपाही बाबा के सालाना उर्स के अंतिम दिन आयोजित नातिया मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर समां बांध दिया। शायर कलीम नूरी ने- उलफत में दिल है बेकरार, ऐ सिपाही बाबा..पेश कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शायर इश्तियाक ने- तेरे नाम की बदौलत मेरा नाम चल रहा है..तथा शायर मैशर भारतगंजी ने- सारा आलम हो गया सैदा मेरे सरकार का..पेश कर खूब वाहवाही लूटी। शायर रहमत ने- मेरे सिपाही बाबा दो हमको सहारा..तथा शायर जावेद ने- दिल जान सब कर दे उनके हवाले..पेश कर खूब तालियां बटोरी। शायर मुश्ताक साहब ने- इतना तो करम करना ऐ नरगिशे मस्ताना..तथा शायर मोइनुद्दीन ने- ऐ शबा मुस्तफा से कह देना गम के मारे सलाम करते हैं..सुनाकर समां बांध दिया। शायर हाफिज रियाज ने- अनोखा निराला वो जिशान आ गया..तथा शायर भैयाज भदोहवीं ने- खाली दामन है हमारा..पेश कर खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में शायर कमर साहब ने- छोड़कर तुम्हारा दर कहां जाए हम..सुनाकर नातिया मुशायरे को एक आयाम तक पहुंचाया।
नातिया मुशायरे के बाद शानदार कौव्वाली का आयोजन किया गया, जिसमें कौव्वालों ने अपनी कौव्वाली से खूब तालियां बटोरी। अंत में सिपाही बाबा के सज्जादे सूफी शमसुद्दीन सनाई हसनी, हाजी निजामुद्दीन नूरी, सूफी हाजी कमरूद्दीन, सूफी सहाबुद्दीन, सूफी जलालुद्दीन ने देश में अमन-चैन व खुशहाली की कामना की। इस दौरान डा. बीयू अंसारी, मास्टर इश्तियाक, नूर हसन, डा. मुुमताज, रमजान मुजाहिद, मोहम्मद इस्माइल, जुग्गी लाल, नन्हें भाई, हाफिज रियाज, सब्बीर हसन, हबीब भाई, शहजाद अली, आकाश, सुदर्शन, नितिन जायसवाल, कल्लू, नूर हसन सहित बड़ी संख्या में जायरीन उपस्थित रहे।