अपर सत्र न्यायाधीश राजेश भारद्वाज ने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया, उनके भाई प्रकाश चौरसिया, जवाहर मौर्या और सपा नेता मुन्नी यादव द्वारा आचार संहिता सहित अन्य धाराओं का अभियोग वापसी संबंधी दाखिल पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन) शुक्रवार को खारिज कर दी। साथ ही अवर न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए सभी आरोपियों को दस अप्रैल 2016 को अवर न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
बता दें कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वादी मुकदमा तत्कालीन शहर कोतवाल शफीक अहमद द्वारा 28 जनवरी 2012 को निर्धारित से ज्यादा व्यक्तियों का जुलूस निकालने, सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करने एवं आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
सूबे में सपा की सरकार बनने पर सपा नेताओं पर दर्ज इस मामले को जनहित में समाप्त करने के लिए सरकार की तरफ से सिफारिश की गई थी। इसे सीजेएम कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2015 को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि विचारण अंतिम स्तर पर है। इसमें जनहित जैसा कुछ नहीं है।
अवर न्यायालय के आदेश के विरुद्ध आरोपीगण ने जिला एवं सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया था। यह रिवीजन स्थानांतरित होकर षष्टम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश भारद्वाज की न्यायालय में चला गया। एक अप्रैल 2016 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने आदेश दिया कि दंडित पुनरीक्षण निरस्त की जाती है।
साथ ही प्रश्नगत आदेश पांच अक्तूबर 2015 पुष्ट किया जाता है। आरोपीगणों को अवर न्यायालय के सामने दस अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का भी आदेश एडीजे कोर्ट ने दिया है। साथ ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सर्कुलर के अनुसार वाद का निस्तारण कराने के लिए आदेशित किया ह।