मिर्जापुर। जिला कारागार में बंदियों को भोजन के लिए बने 119 वर्ष पुराने पाकशाला का कायाकल्प कर दिया गया है। पाकशाला का रंग-रोकन करने के साथ ही बाहर एक नया शेड बनाया गया है। जिससे बिजली न होने पर बाहर शेड में भोजन बनाया जा सके। पाकशाला का कायाकल्प कर उसे आधुनिक भी बनाया गया है। पाकशाला में रोटी बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई है।
जिला कारागार 1901 में बना है। जिला कारागार में उस समय तीन सौ बंदियों की क्षमता के लिए पाकशाला का निर्माण हुआ था। इस समय जिला जेल में साढ़े सात सौ बंदी हैं। कुछ समय पहले बंदियों की संख्या और अधिक थी। इसमें से सैकड़ों बंदी जो सोनभद्र के थे, उन्हें नया जेल बनने पर सोनभद्र स्थानांतरित कर दिया गया। इससे जेल का भार कुछ कम हुआ पर क्षमता के हिसाब से संसाधनों में वृद्धि नहीं हुई। जिला कारागार के जर्जर पाकशाला की मरम्मत कराई गई। जेलर सुरेश मिश्रा ने बताया कि पाकशाला की मरम्मत कराने के साथ की दीवारों के बाहर और अंदर पुट्टी कराई गई है। अंदर रोशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। पाकशाला में पानी के लिए नल की संख्या बढ़ाई गई है। पाकशाला छोटा होने के कारण बाहर एक शेड का निर्माण कराया गया है। जिससे भोजन बनने के बाद उसमें रखा जा सके या बिजली न रहने पर बंदी बाहर शेड में भोजन बना सके। दो सप्ताह तक पाकशाला में कार्य कराया गया। पाकशाला का पूरी तरह से काया कल्प कर दिया गया है।
रोटी बनाने की लगी है आधुनिक मशीनें
मिर्जापुर। जेल अधीक्षक अनिल राय ने बताया कि जेल में बंदियों को रोटी बनाने के लिए आधुनिक मशीन लगाई गई है। इसमें आटा गुंथने के लिए एक, लोई काटने के लिए एक और रोटी बनाने के लिए दो मशीनें लगाई गई है। पाकशाला में 20 बंदी भोजन का निर्माण करने में लगाए गए हैं।