विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान करने के बाद माता के मंदिर पहुुंचे भक्तों ने विधिवत दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की। मंदिर पहुुंचने के बाद किसी ने गर्भगृह में जाकर तो किसी ने झांकी से मां के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। भक्त हाथ में नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, कपूर-धूपबत्ती एवं प्रसाद लेकर विंध्यधाम पहुुुंचे जहां मां का फूलों से किया गया भव्य शृंगार का दर्शन पाकर निहाल हो उठे। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने जहां एक ओर हवन कुंड का परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने, वहीं धाम परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन भी किया। मंदिर के छत पर साधक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अनुष्ठान करने में तल्लीन दिखे, वहीं अनवरत मुंडन संस्कार कराने का भी क्रम चलता रहा। पावन विंध्यधाम में दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। त्रिकोण परिक्रमा करने के दौरान भक्तों ने मां काली व मां अष्टभुजा देवी सहित समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की। विंध्य दरबार में उमड़ी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देेखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।