प्रबोधिनी एकादशी पर आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के पावन दरबार में लगभग चार लाख श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धाभाव से दर्शन-पूजन किया।
फूलों से किया गया मां का भव्य श्रृंगार दर्शन कर श्रद्घालु निहाल हो उठे। भोर में मंगला आरती के बाद शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा और मां का दरबार जयकारे से गूंजता रहा।
जगत जननी के धाम में शीश झुकाने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित हवन कुंड की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की।
देवोत्थान एकादशी पर विंध्यधाम में भोर से लेकर देर रात तक दर्शन-पूजन करने के लिए भक्तों का रेला लगा रहा। गंगा स्नान करने के बाद माला-फूल, नारियल-चुनरी, रोली-रक्षा, लाचीदान-दीपक आदि टोकरी में लिए श्रद्धालु विंध्यधाम पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे।
मंदिर में अनवरत बज रहे घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़े एवं माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
विंध्याचल की न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी गली सहित बच्चा पाठक की गली, पक्काघाट गली, जैपुरिया गली, सदर बाजार गली सहित कई अन्य गलियां व मार्ग आस्थावानों से पटे रहे।
प्रसाद की दुकानों पर भक्तों के बीच 11 रुपये से लेकर 501 सौ रुपये तक के प्रसाद बेचे जा रहे थे। मंदिर के छत पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजार्चन हो रही थी तो शहनाई और नगाड़े की धुन पर मुंडन संस्कार।