मिर्जापुर। जिला कारागार में वार्डर पर तैनात सिपाही आनंद शुक्ला (45) की बीमारी से चलते रविवार की रात मौत हो गई। पत्नी प्रीति ने जेल अधीक्षक पर छुट्टी ना देने आरोप लगाया। पत्नी का आरोप है कि वह बेहतर इलाज नहीं करा सके और मौत हो गई।
जौनपुर के खेतासराय थाना क्षेत्र के हरन गांव निवासी आनंद शुक्ला (45) छह माह से जिला कारागार में वार्डर के पद पर तैनात थे। पिछले तीन दिन से बीमार थे। रविवार शाम सात बजे के करीब तबीयत अचानक खराब हो गई। जेल कर्मियों का कहना है कि जब जेल अधीक्षक से इलाज कराने के संबंध में बात की तो जेल अधीक्षक ने कहा कि कारागार के चिकित्सक से इलाज करा लें। इसी बीच हालत गंभीर हो गई। तब उन्हें मंडलीय अस्पताल इलाज के लिए ले आया गया। मंडलीय अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात डाॅक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसकी जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। जेल कर्मी मंडलीय अस्पताल पहुंच गए। सूचना पर मंडलीय अस्पताल पहुंची वार्डर की पत्नी प्रीति शुक्ला ने आरोप लगाते हुए बताया कि पति के पैर में झनझनाहट की समस्या थी। वह इलाज कर रहे थे । छुट्टी के लिए जेल अधीक्षक के पास आवेदन किया पर उन्होंने छुट्टी नहीं दी। फोन कर पति ने यह बताया कि छुट्टी नहीं मिल रही है। मेडिकल लेने के लिए कहा, पर नहीं मिला। छुट्टी नहीं मिलने के कारण उनको बेहतर इलाज नहीं मिल सका।
कोट
रविवार दोपहर में पता चला कि तबीयत खराब है। इलाज के लिए भेजा गया। फिजिशियन को दिखाने के लिए प्राइवेट डॉक्टर के यहां भेजा गया। डॉक्टर को दिखाने के बाद आवास पर आए। शाम को सूचना मिली थी तबीयत खराब हो गई है। फिर उन्हें सिपाहियों के साथ अस्पताल भेजा। कुछ दिन पहले आलोक के साले की शादी थी। सात दिन की छुट्टी दी गई थी। छुट्टी दी जाती है। बीमार होने पर पहले उनका उपचार कराया गया।जेल आरपी चौधरी, जेल अधीक्षक