अंगुलियों पर लग रही काली स्याही ने गुरुवार को बैंकों में पैसा बदलने वालों की भीड़ को कम कर दिया। स्टेट बैँक और पंजाब नेशनल बैंक की शाखाओं को छोड़ कर अन्य बैंकों में भीड़ कम दिखी। कुछ बैंकों में तो न के बराबर लोग दिखे। हालांकि इसके बावजूद कई बैंकों में जल्दी कैश समाप्त हो गया।
बैंकों के बाहर हजारों लोगों की भीड़ का नजारा गुरुवार को देखने को नहीं मिला। बैंकों में जो लोग हजार पांच सौ के नोटों को बदलने पहुंचे थे उन्हें मतदान के समय अंगुलियों पर लगाई जाने वाली स्याही लगाई जा रही थी। इससे धन कुबेरों के आशा पर तुषारापात हो गया है। कल तक दिहाड़ी पर नोट बदलने वाले लोग आज बैंक की शाखाओं से नदारद रहे। इससे लाइन में लगे आम लोगों की बारी जल्दी आ गई।
पकड़े जाने के डर से कई लोग जो लगातार चार हजार रुपये बदल कर धन कुबेरों से कुछ घंटों में पांच सौ रुपये प्राप्त कर ले रहे थे, बैंक शाखाओं पर नहीं पहुंचे थे। डकीनगंज स्थित स्टेट बैंक में सुबह से ही आम लोग पैसे बदलने और जमा करने पहुंचे थे। यहां सबसे अधिक लोगों की लाइन दिखी। हालांकि यहां नोट बदलने वाले लोगों को हजारों की संख्या में पांच और दस के सिक्के दिये जा रहे थे।
इससे उनको थोड़ी परेशानी भी हुई। रमईपट्टी स्थित स्टेट बैंक और पंजान नेशनल बैंक में भी कमोबेश यही हालात थे। सेंट्रल बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, यूनियन बैँक, बैंक आफ इंडिया, केनरा बैंक में रोज की अपेक्षा कम लोग लाइन में लगे दिखे। शुक्रवार से जब बैंक नोट बदल कर साढ़े चार हजार की जगह दो हजार रुपये दिये जाएंगे तो पैसा समाप्त होने पर फिर से बैंकों की शाखाओं पर भीड़ बढ़ने की आशंका है।
ग्रामीण इलाकों के बैंकों में हालांकि स्याही का बहुत असर देखने को नहीं मिला। कैश की कमी सीखड़, चुनार, मड़िहान, अहरौरा, जिगना, कछवां आदि क्षेत्रों के बैंकों में होने की वजह से किसानों को निराशा हाथ लगी। एटीएम भी निराश करने वाले स्थिति में रहे। सीखड़ संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के बैंकों में बैंक मित्रों द्वारा पैसे जमा करने की सुविधा तो दी गई है किंतु उन्हें बैंक द्वारा निकासी नहीं किए जाने से नाराजगी देखी गई।